सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हो रही है, जिसमें एक किताब का जिक्र है। इस किताब को आज से 39 साल पहले लिखा गया था। अगर इस किताब में लिखी बातों पर विश्वास करें तो कोरोना वायरस का आधार उस समय ही रख दिया गया था। लेकिन आपको बता दें कि ये खबर गलत है। 

चीन: आज पूरी दुनिया में कोरोना या कोविड 19 का आतंक है। इस वायरस ने अभी तक एक हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली है और करीब 82 हजार लोग इसकी चपेट में हैं। इस वायरस का कोई भी इलाज नहीं ढूंढा गया है। इस कारण पूरी दुनिया इस वायरस को लेकर चिंतित है। चीन के वुहान के मीट मार्केट से शुरू हुए इस वायरस का कहर ऐसा है कि इस शहर को बंद ही कर दिया गया है। फिर भी ये वायरस तेजी से फ़ैल रहा है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक किताब के कुछ पन्ने वायरल हो रहे हैं। 

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39 साल पहले की किताब 
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में एक आर्टिकल छपा है। इस आर्टिकल के मुताबिक, आज से 39 साल पहले यानी 1981 में ये किताब लिखी गई थी। इस किताब का नाम द आईज ऑफ डार्कनेस था। किताब में एक मां की कहानी थी, जो एक सीक्रेट मिशन पर गए बेटे को ढूंढ रही थी। लेकिन उसका बेटा एक वायरस, जिसका नाम वुहान 400 था, की चपेट में आ जाता है। इस किताब में वायरस के बारे में जो कुछ भी लिखा गया है, उसने सभी को हैरान कर दिया है। 39 साल पहले लिखी इस किताब में कोरोना वायरस का जिक्र है। इसके लेखक डीन कुन्टज है। 

तो क्या हथियार था करोना?
किताब में जिस वायरस का जिक्र हैं, उसे सीक्रेट हथियार के तौर पर बनाया गया था। इसे वुहान में बनाया गया था। चीन ने दुश्मन देशों को तबाह करने के लिए इस बायोलॉजिकल हथियार को बनाया था।लेकिन उसके ही शहर के लोग इससे प्रभावित हो जाते हैं। किताब की कहानी जैसा ही कुछ चीन में अभी हो रहा है। ये वायरस भी वुहान से ही फैला है। और अब पूरी दुनिया को चपेट में ले रहा है। 

ये है सच्चाई
लेखक ने ये किताब मात्र कल्पना कर लिखी थी। इसका सच से कोई लेना देना नहीं है। अगर इस किताब के साथ किसी तरह की घटना एकसमान लग रही है, तो मात्र कोइंसिडेन्स है। जहां किताब में जिस हथियार का जिक्र है, वो इंसान द्वारा बनाया गया है, वहीं कोरोना वायरस जानवरों द्वारा फैला है। 

सामने आई थी षड्यंत्र की खबर 
दुनिया में कोरोना वायरस के फैलने के बाद बीच में ये भी खबर आई थी कि चीन के वुहान में बने विरोलॉजी लैब से ये वायरस फैला था। लेकिन चीन सरकार ने इससे इंकार कर दिया था। अब 39 साल पहले लिखी इस किताब को पढ़कर कई लोग हैरान भी हैं और कई आश्चर्य में हैं। अब तो वाकई कुछ लोगों को ये वायरस चीन का हथियार ही लग रहा है, जो गलती से उसके ही देश में फैल गए।