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इस नवरात्र खा सकते हैं शाकाहारी अंडे, IIT दिल्ली के स्टूडेंट्स ने किया तैयार

क्या आपको अंडे काफी पसंद हैं लेकिन नवरात्र में आप इन्हें नहीं खा सकते? तो आपके लिए ही आईआईटी दिल्ली ने पौधों से खास तैयार किये हैं शाकाहारी अंडे। 

Delhi iit prepares vegetarian eggs
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New Delhi, First Published Sep 22, 2019, 1:14 PM IST
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नयी दिल्ली:  पौधों से बने शाकाहारी अंडे, जैविक तौर पर घुलनशील कार्डियक स्टेंट, बिजली के बिना काम करने वाली ताप प्रणाली और हल्की बुलेटप्रूफ जैकेट जैसे 200 नवोन्मेषी उत्पादों को आईआईटी दिल्ली में तीसरे उद्योग दिवस के अवसर पर शनिवार को प्रदर्शित किया गया।

लोगों में पौधों से बने अंडे चखने की सबसे ज्यादा ललक देखने को मिली। ये अंडे मसूर की दाल से बनाए गए हैं और इन्हें मांसाहारी खाने के विकल्प के तौर पर पेश किया गया, जबकि इसका स्वाद एकदम असली अंडे जैसा है।

एक दूसरे दल ने जैविक तौर पर घुलनशील कार्डियक स्टेंट का प्रदर्शन किया, जिसका इस्तेमाल धमनी की रुकावट दूर करने के लिए किया जाता है। धातु के स्टेंट के विपरीत ये पांच साल में शरीर के अंदर ही गल जाते हैं।

दर्शकों ने भारतीय सैनिकों के लिए तैयार की गई एक बुलेटप्रूफ जैकेट को भी काफी पसंद किया, जो अभी इस्तेमाल की जा रही जैकेट के मुकाबले 30 प्रतिशत हल्की है।

इस वार्षिक कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रमुख कारोबारी, शोध समुदाय के लोग, फिनलैंड और जापान के प्रतिनिधि और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली के लोग शामिल हुए। इस प्रदर्शनी में आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र भी शामिल हुए, जिन्होंने नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था में निवेश की जरूरत पर जोर दिया।

इस मौके पर नीति आयोग के सदस्य वी के पॉल ने कहा, “भारत की स्वाभाविक प्रगति हमारे द्वारा खोजे गए और समझे गए विज्ञान पर, हम जो प्रौद्योगिकी सृजित और विनिर्मित कर सकते हैं, उस पर और हमारे लोग जिन उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं, उन पर निर्भर है। इसके लिए नवाचार जरूरी है।”

पॉल ने चिकित्सा उपकरण बाजार का उदाहरण दिया, भारत में इस समय जिसका बाजार सात से आठ अरब डॉलर का है।

उन्होंने कहा कि इस मांग का 75 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा होता है। हालांकि भारत की प्रतिभा और क्षमता को देखते हुए ये बाजार 50 अरब डॉलर का हो सकता है और इस लक्ष्य को सिर्फ नवाचार से ही हासिल किया जा सकता है।

आईआईटी दिल्ली के निदेशक व रामगोपाल राव ने कहा कि शैक्षणिक समुदाय की भूमिका पहले शिक्षा तक सीमित थी, जो अब बदल गई है।
 

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