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यहां चोरों और क्रिमिनल्स को सजा देने के लिए होता है 'कंकालों का डांस'

दुनिया भर में अलग-अलग धार्मिक समुदायों में कुछ ऐसी परंपराएं प्रचलित हैं, जिनके बारे में जान कर हैरत होती है। ऐसी ही पंरपराओं में शामिल है तिब्बत के बौद्ध समुदाय के चितिपति देवका का कंकाल डांस।
 

Here the dance of 'Chitipati' skeletons takes place to punish the thieves
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Lhasa, First Published Aug 22, 2019, 3:12 PM IST
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ल्हासा। तिब्बत के बौद्ध समुदाय में एक ऐसी परंपरा का चलन है, जिसके बारे में बाहर के लोग जान कर हैरत में पड़ जाते हैं। इस परंपरा के तहत साल में दो बार बौद्ध मॉन्क कंकाल का मास्क पहन डांस करते हैं और उत्सव मनाते हैं। बौद्ध समुदाय के लोगों का मानना है कि ऐसा करने से उनके देवता 'चितिपति' आ जाते हैं और वे क्रिमिनल्स और चोरों को सजा देते हैं। 

कौन हैं 'चितिपति' देवता
तिब्बत की बौद्ध परंपरा में 'चितिपति' देवता को कंकालों की एक जोड़ी के रूप में दिखाया गया है। इनमें एक पुरुष और एक स्त्री है। इनके बारे में कहा जाता है कि जब ये धरती पर आते हैं तो अपराधियों और चोरों में खौफ छा जाता है। बौद्ध समुदाय के लोगों का मानना है कि देवी-देवता की यह जोड़ी हर किस्म के अपराधियों और बुरे लोगों से उनकी रक्षा करती है।  

कैसे उत्पति हुई 'चितिपति' की
एक किवदंती के अनुसार, बौद्ध मॉन्क की एक जोड़ी किसी कब्रिस्तान में ध्यान कर रहे थी। इसी दौरान एक चोर उनके पास आया, लेकिन वे ध्यान में इतने मग्न थे कि उन्हें इसका पता नहीं चला। जब चोर ने देखा कि उनके पास कुछ नहीं है तो उसने ध्यान में डूबे उस बौद्ध मॉन्क की जोड़ी की हत्या कर दी और उनकी लाश को वहीं छोड़ कर भाग गया। 

मृत बौद्ध मॉन्क की आत्मा ने लिया 'चितिपति' का रूप
इसके बाद मृत मॉन्क की आत्मा ने चितिपति' का रूप लिया और तमाम चोरों और अपराधियों को खत्म करना शुरू कर दिया। कहते हैं कि जब भी किसी घर में चोर जाते तो कंकालों की जोड़ी उनके सामने आ जाती और उसे मार डालती। इससे चोरों और दूसरे अपराधियों में भी आतंक छा गया और वे चोरी व अपराध करने से डरने लगे। 

उनकी याद में मनाते हैं फेस्टिवल
इन्हीं 'चितिपति' की याद में और चोरो-अपराधियों से बचाव के लिए बौद्ध लोग साल में दो बार एक फेस्टिवल मनाते हैं, जिसमें 'चितिपति' की तरह कंकाल का मास्क पहन कर डांस करते हैं। इस फेस्टिवल में आम लोगों के अलावा पेशेवर डांसर भी स्केल्टन डांस करते हैं और सिर पर सींग सजा शंख वगैरह भी बजाते हैं। तिब्बत में यह उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस उत्सव के मनाए जाने से अभी भी चोर और अपराधी किस्म के लोग खौफजदा हो जाते हैं और गलत काम करने से पहले कई बार सोचते हैं। 

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