कई बार नए साल का जश्न मनाने के दौरान कुछ ऐसा हो जाता है, जिसका किसी को कोई अंदाज नहीं रहता। खुशी को गम में बदलते जरा भी देर नहीं लगती।

हटके डेस्क। कई बार नए साल का जश्न मनाने के दौरान कुछ ऐसा हो जाता है, जिसका किसी को कोई अंदाज नहीं रहता। खुशी को गम में बदलते जरा भी देर नहीं लगती। कुछ ऐसा ही हुआ था शंघाई में 31 दिसंबर, 2014 की रात को। नए साल की शुरुआत के ठीक पहले आधी रात को ऐसी भगदड़ मची कि 36 लोग मारे गए और करीब 47 लोग घायल हो गए। मृतकों में ज्यादा संख्या गर्ल स्टूडेंट्स की थी। 

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चारों तरफ मची थी चीख-पुकार
नए साल का जश्न मनाने के लिए हजारों की संख्या में लोग शंघाई में जुटे थे। नए साल की शुरुआत होने में महज 25 मिनट की देर थी कि अचानक भगदड़ मत गई। झुओ नाम के एक मीडियाकर्मी ने लिखा कि उसे कुछ भी समझ में नहीं आया कि यह सब कैसे हुआ। उसने अचानक लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनीं। उसने सुना कि लड़कियां मदद के लिए चिल्ला रही थीं। एक दूसरे शख्स ने सीएनएन को बताया था कि जश्न का दौर चल रहा था। सभी वॉटरफ्रंट पर एन्जॉय कर रहे थे, अचानक चीख-पुकार की आवाजें आने लगीं और लोग भागने लगे। उसने कहा कि वह खुद भगदड़ में धक्के खाता करीब 100 फीट दूर चला गया। 

30 सेकंड तक रही भगदड़
यह भगदड़ महज 30 सेकंड तक रही, लेकिन इसी दौरान भारी नुकसान हुआ। लोग भाग रहे थे और एक-दूसरे पर गिर रहे थे। कोई नहीं जान रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है। बावजूद इसके ज्यादा लोग नहीं मारे गए। मौके पर तत्काल पुलिस आ गई और उसने रेस्क्यू का काम शुरू कर दिया। इससे काफी लोगों की जान बचा ली गई। 

और भी हो सकता था नुकसान
पुलिस और एम्बुलेंस के समय से आ जाने सो लोगों की जानें बचा ली गईं, नहीं तो और भी ज्यादा नुकसान हो सकता था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने उस वक्त मीडियाकर्मियों को बताया था कि ढेर सारे लोग निकलने के रास्ते पर जमा हो गए। वे जान जाने के डर से होश खो बैठे थे। अगर उन्होंने हिम्मत से काम लिया होता तो लोग मारे नहीं जाते। बहरहाल, 10 मिनट के भीतर परिस्थिति पर काबू पा लिया गया। लोगों का कहना है कि इस जश्न में शामिल होने के लिए एक डॉलर का टिकट लगाया गया था, जिसे लेने के लिए लोगों की जो भीड़ जुटी, उससे भगदड़ मची। लेकिन पुलिस ने इससे इनकार किया।