दक्षिणी तुर्की में शक्तिशाली भूकंप ने तबाही मचा दी है। भूकंप से कई इमारतें ढह गईं। भूकंप की तीव्रता 7.8 मापी गई है। जीएफजेड ने कहा कि भूकंप 10 किमी की गहराई पर था।

अंकारा(Ankara).दक्षिणी तुर्की या तुर्किये (Turkey) में शक्तिशाली भूकंप ने तबाही मचा दी है। भूकंप से कई इमारतें ढह गईं। भूकंप की तीव्रता 7.8 मापी गई है। जीएफजेड ने कहा कि भूकंप 10 किमी की गहराई पर था। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (जीएफजेड) ने कहा कि सोमवार तड़के मध्य तुर्की में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया। 

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शुरुआती जानकारी के अनुसार, तुर्किये सहित सीरिया, लेबनान और इजराइल में 1400 लोगों की मौत बताई जा रही है। वहीं, 1000 से अधिक घायल हैं। लेकिन यह आंकड़ा अधिक होने की आशंका है। सबसे अधिक मौतें तुर्किये में हुईं। हालांकि विभिन्न मीडिया हाउस मरने वालों का आंकड़ा अलग-अलग बता रहे हैं। दरअसल, आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। मारे गए लोगों में ज्यादातर माल्टा और सेनलुइर्फ़ा के हैं। तुर्किये के अडाना शहर में बड़ी-बड़ी इमारतें ढह गईं। सबसे अधिक मौतें सीरिया में होना बताई जा रही हैं। लेबनान और इजराइल नुकसान की खबर नहीं है।

भारत आया मदद को आगे

जब तुर्किये में भूकंप की खबरें दुनियाभर के मीडिया में फैलीं, उस समय पीएम मोदी कर्नाटक के दौरे पर थे। उन्होंने अपने कार्यक्रम के दौरान तुर्की को मदद का भरोसा दिलाया। वहीं, प्रधानमंत्री के निर्देश पर उनके सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने तत्काल राहत उपायों पर चर्चा करने के लिए साउथ ब्लॉक में एक बैठक की। इसमें यह निर्णय लिया गया कि तुर्की गणराज्य की सरकार के समन्वय से राहत सामग्री के साथ एनडीआरएफ और चिकित्सा दलों के खोज और बचाव दलों को तुरंत भेजा जा रहा है। विशेष रूप से प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड और आवश्यक उपकरणों के साथ 100 कर्मियों वाली एनडीआरएफ की दो टीमें खोज और बचाव कार्यों के लिए भूकंप प्रभावित क्षेत्र में जाने के लिए तैयार हैं। आवश्यक दवाओं के साथ प्रशिक्षित डॉक्टरों और पैरामेडिक्स के साथ मेडिकल टीमें भी तैयार की जा रही हैं। तुर्की गणराज्य की सरकार और अंकारा में भारतीय दूतावास और इस्तांबुल में महावाणिज्य दूतावास के कार्यालय के समन्वय से राहत सामग्री भेजी जाएगी। बैठक में कैबिनेट सचिव, गृह मंत्रालय, एनडीएमए, एनडीआरएफ, रक्षा, विदेश मंत्रालय, नागरिक उड्डयन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

जानिए पूरी डिटेल्स

यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) ने सोमवार को कहा कि दक्षिणी तुर्की में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया है। यूएसजीएस के अनुसार, भूकंप की गहराई 24.1 किलोमीटर (14.9 मील) है, जो गाजियांटेप प्रांत के नूरदागी से 23 किलोमीटर (14.2 मील) पूर्व में स्थित है। यूएसजीएस ने कहा कि मध्य तुर्की में मजबूत आफ्टरशॉक्स महसूस किए गए हैं, जहां पहले भूकंप के लगभग 11 मिनट बाद 9.9 किलोमीटर की गहराई में 6.7 तीव्रता का एक और भूकंप आया। नूरदा इलाक़ा ग़ाजिएनटेप के पास है। ग़ाजिएनटेप की आबादी क़रीब 20 लाख बताई जाती है। इनमें से 5 लाख सीरियाई शराणार्थी हैं। भूकंप से बड़े पैमाने पर जानोमाल का नुक़सान की आशंका जताई जा रही है।

इजरायल तक झटके

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भूकंप के झटके इज़राइल में भी महसूस किए गए थे। इजराइल में कई वर्षों बाद तगड़े झटके महसूस किए गए। कुछ लोगों ने शुरुआती भूकंप के बाद भी आफ्टरशॉक्स महसूस किए।

तुर्की में, सोशल मीडिया पर रिपोर्टों ने संकेत दिया कि भूकंप से व्यापक क्षति हुई है। वीडियो में इमारतों को मलबे के ढेर में गिरा हुआ दिखाया गया है, रेस्क्यू टीमें मलबे हटाकर लोगों को बाहर निकालने में लगी हैं।

इज़राइल में, मैगन डेविड एडोम बचाव सेवा ने कहा कि उसे आपातकालीन सहायता के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है।

भूकंप साइप्रस, सीरिया, लेबनान, ग्रीस, जॉर्डन, इराक और रोमानिया, जॉर्जिया और मिस्र में भी महसूस किया गया। बेरूत में भूकंप ने इमारतों को हिलाकर रख दिया। अलमारियों में रखा सामान नीचे गिर पड़ा।

इज़राइल, जो भूकंपीय रूप से सक्रिय सीरियाई-अफ्रीकी दरार घाटी पर स्थित है, दशकों से एक बड़े भूकंप से निपटने तैयारियों में लगा है। ऐतिहासिक रूप सेइ स देश ने सदी में एक बार, औसतन गंभीर भूकंपों का अनुभव किया है। आखिरी बार 1927 में तेज भूकंप आया था।

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जानिए क्यों आता है भूकंप

धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी हुई है, इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत, वर्गों में बंटी हुई है, जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं, तो भूकंप आ जाता है। ये प्लेट्स क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर, दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इसके बाद वे अपनी जगह तलाशती हैं और ऐसे में एक प्लेट दूसरी के नीचे आ जाती है।

भूकंप की गहराई से क्या मतलब है

हलचल कितनी गहराई पर हुई है। भूकंप की गहराई जितनी ज्यादा होगी सतह पर उसकी तीव्रता उतनी ही कम महसूस होगी।

क्यों टकराती हैं प्लेटें

ये प्लेंटे बेहद धीरे-धीरे घूमती रहती हैं। इस प्रकार ये हर साल 4-5 मिमी अपने स्थान से खिसक जाती हैं। कोई प्लेट दूसरी प्लेट के निकट जाती है तो कोई दूर हो जाती है। ऐसे में कभी-कभी ये टकरा भी जाती हैं।

अब जानिए किस तीव्रता के भूकंप से कितना नुकसान

2.0 तीव्रता: रिएक्टर स्केल पर इस तीव्रता के भूकंप रोज करीब आठ हजार आते हैं, लेकिन ये महसूस नहीं होते।

2.0 से लेकर 2.9 की तीव्रता: रोज करीब हजार झटके आते हैं, लेकिन ये भी महसूस नहीं होते।

3.0 से लेकर 3.9 की तीव्रता: रिक्टर स्केल पर इस तीव्रता के झटके साल में करीब 49 हजार बार आते हैं। ये भी महसूस नहीं होते, पर मामूली नुकसान कर देते हैं।

4.0 से 4.9 की तीव्रता: साल में लगभग 6200 बार दर्ज किए जाते हैं। ये झटके महसूस होते हैं और नुकसान भी कर देते हैं।

5.0 से 5.9 तीव्रता: ये साल में लगभग 800 बार महसूस होते है। ये नुकसान पहुंचाते हैं।

6.0 से 6.9 तक की तीव्रता: साल में लगभग 120 बार दर्ज किए जाते हैं। ये 160 किलोमीटर तक के दायरे में बड़ा नुकसान कर देते हैं।

7.0 से लेकर 7.9 तक की तीव्रता: ये तबाही का कारण बनते हैं। ये साल में लगभग 18 बार आते हैं।

8.0 से लेकर 8.9 तक की तीव्रता: यह भूकंप सैकड़ों किलोमीटर के क्षेत्र में भयंकर तबाही ला देता है। हालांकि ये साल में कभी-कभार ही आते हैं।

9.0 से लेकर 9.9 तक की तीव्रता: यह भूकंप विनाश ला देता है। हजारों किलोमीटर के क्षेत्र में तबाही आ जाती है। ये 20 साल में एक बार आने की आशंका होती है।

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