राजधानी काबुल से भारतीय वायुसेना का एक विमान बीते 17 अगस्त को 150 भारतीयों को लेकर स्वदेश लौट था। वायुसेना का सी-17 विमान काबुल से सीधे गुजरात के जामनगर पहुंचा था। काबुल में अभी भी काफी भारतीय फंसे हुए हैं। 

काबुल। अफगानिस्तान पर तालिबानी हुकूमत होने के बाद स्थितियां दिन-ब-दिन बिगड़ती ही जा रही हैं। अफगानिस्तान से भारतीय नागरिकों को निकालने का ऑपरेशन फिर शुरू हो गया है। अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान से लगभग 150 भारतीयों को कतर एयरवेज से दोहा भेज दिया है। 
दोहा पहुंचे भारतीयों को इसके बाद देश लाया जाएगा। अमेरिकी सेना ने करीब 150 भारतीयों को कतर एयरवेज से दोहा पहुंचाया है। 

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एयरफोर्स का विमान भी दो दिन पहले लाया था डेढ़ सौ भारतीयों को

राजधानी काबुल से भारतीय वायुसेना का एक विमान बीते 17 अगस्त को 150 भारतीयों को लेकर स्वदेश लौट था। वायुसेना का सी-17 विमान काबुल से सीधे गुजरात के जामनगर पहुंचा था। यहां से लोगों को गाजियाबाद लाया गया था। 16 अगस्त को भारतीय वायुसेना का सी-19 विमान अफगानिस्तान से कुछ कर्मियों को लेकर भारत लौटा था। काबुल में अभी भी काफी भारतीय फंसे हुए हैं। 

अफगानिस्तान का झंड़ा लहराने पर तालिबानियों ने गोलियों से भून डाला, मची भगदड़

तालिबानियों के अत्याचार के खिलाफ कुछ इलाकों में लोग उठ खड़े भी होना शुरू कर दिए हैं। हालांकि, तालिबान के अत्याधुनिक हथियारों के आगे ये बेकसूर लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। पाकिस्तान से सटे अफगानी प्रांत कुनार की राजधानी असादाबाद में तालिबानियों ने कईयों को मार डाला। यहां अफगानिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर निकाली जा रही रैली में लोग अफगानी झंडा लहरा रहे थे। इन पर तालिबान ने फायरिंग कर दी, जिससे भगदड़ मच गई। इस हिंसा में कई लोग मारे गए हैं।
ये साफ नहीं है कि मारे गए लोगों को गोली लगी थी या फिर वे भगदड़ के शिकार हुए थे। इस बीच तालिबान ने कहा है कि अफगानिस्तान का झंडा अब नई बनने वाली तालिबानी सरकार ही तय करेगी।

अफगानिस्तान इतना छोटा नहीं कि पाकिस्तान इसे निगल जाए

तालिबानी हुकूमत के बीच अफगानिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने तालिबान के साथ पाकिस्तान पर भी निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा है- ‘सभी देशों को कानूनी कायदों का सम्मान करना चाहिए, हिंसा का नहीं। अफगानिस्तान इतना बड़ा है कि पाकिस्तान इसे निगल नहीं सकता और तालिबान इस पर शासन नहीं कर सकता। अपने इतिहास में अमानवीयता और आतंकियों के आगे झुकने का अध्याय मत जुड़ने दीजिए।‘