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काबुल में आतंकियों का खूनी खेल : 2 महीने, 4 बड़े बम धमाके, 154 लोगों की ले ली जान, बच्चों तक पर नहीं खाया रहम

अफगानिस्तान में जबसे तालिबान ने कब्जा किया है, तबसे वहां निर्दोष जनता पर होने वाले बम धमाकों की संख्या काफी बढ़ गई है। पिछले दो महीनों में हुए 4 बम धमाकें में जहां 154 लोग मारे गए हैं, वहीं हजारों घायल हैं। शुक्रवार को भी काबुल के एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में धमाका हुआ, जिसमें 100 से ज्यादा स्टूडेंट के मरने की खबर है।

Bloody game of terrorists in Kabul, 154 people killed and thousands injured in last 2 month kpg
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First Published Sep 30, 2022, 6:55 PM IST

Bomb Blast in Kabul: अफगानिस्तान में जबसे तालिबान ने कब्जा किया है, तबसे वहां निर्दोष जनता पर होने वाले बम धमाकों की संख्या काफी बढ़ गई है। पिछले दो महीनों में हुए 4 बम धमाकें में जहां 154 लोग मारे गए हैं, वहीं हजारों घायल हैं। शुक्रवार को भी राजधानी काबुल के एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में बम धमाका हुआ, जिसमें 100 से ज्यादा स्टूडेंट मारे गए हैं। इतना ही नहीं, बम धमाकों के बाद तालिबान ने अस्पताल के मालिक को धमकी दी है कि वो किसी भी तरह की जानकारी मीडिया में लीक न करे। 

हजारा शिया समुदाय को बनाया निशाना : 
यह हमला अफगानिस्तान में पहले से ही हाशिए पर चल रहे हजारा शिया कम्युनिटी पर हुआ है। यहां ज्यादा आबादी हजारा (शिया मुस्लिमों की जाति) मुस्लिमों की है। ये समूह पिछले कुछ महीनों से लगातार आतंकियों के निशाने पर है। इस हमले में ISKP (इस्लामिक स्टेट खोरासान ग्रुप) का हाथ होने का शक है। यह आतंकी संगठन वहाबी विचारधारा वाले सुन्नी समुदाय से ताल्लुक रखता है। हालांकि, अभी किसी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।  

कौन है हजारा शिया समुदाय?
हजारा शिया मुसलमानों को मंगोल मूल का माना जाता है। ये भी कहा  जाता है कि ये तुर्क और मंगोल मूल का मिश्रण है। फिलहाल हजारा शिया समुदाय अफगानिस्तान की तीसरी सबसे बड़ी आबादी है। इसके अलावा पाकिस्तान के बलूचिस्तान और ईरान में भी इस समुदाय के लोग हैं। सुन्नी चरमपंथी अक्सर शिया मुसलमानों को निशाना बनाते हैं। 

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टेबल्स और चेयर के नीचे फंसे बच्चों के शव : 
बता दें कि काबुल के काज हायर एजुकेशन सेंटर पर शुक्रवार को मॉक टेस्ट होने वाला था। इसलिए यहां स्टूडेंट्स की तादाद काफी ज्यादा थी। एक स्टूडेंट ने AFP न्यूज को बताया कि वहां करीब 600 स्टूडेंट्स थे, जिनमें ज्यादातर लड़कियां थीं। हमारे सामने पुलिस ने 15 घायलों और 9 शवों को बाहर निकाला। इनमें से कई शव क्लास के अंदर कुर्सियों और टेबल्स के नीचे पड़े थे।

दो महीने में हुए ये 4 बड़े धमाके :
अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आने के बाद बम धमाके और तेज हो गए हैं। पिछले दो महीने में ही यहां 4 बड़े ब्लास्ट हो चुके हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल हुए हैं। 
 
17 अगस्त : 
कहां - काबुल की मस्जिद 
मौतें - 20 

राजधानी काबुल में 17 अगस्त को एक मस्जिद में धमाका हुआ, जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई थी। 40 लोग घायल हुए थे। हमला काबुल के खैरखाना इलाके में 'अबूबकिर सेदिक' मस्जिद में मगरिब की नमाज के दौरान हुआ था। ब्लास्ट में मस्जिद के मौलवी आमिर मोहम्मद काबुली की भी मौत हुई थी। घायलों में 5 बच्चे भी शामिल थे।

2 सितंबर : 
कहां - हेरात की गुजरगाह मस्जिद
मौतें - 14

2 सितंबर को आफगानिस्तान के हेरात प्रांत की गुजरगाह मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद बम विस्फोट में 14 लोगों की मौत हो गई थी। 200 लोग घायल हुए थे। धमाके में मस्जिद के इमाम मौलवी मुजीब रहमान अंसारी की मौत भी हो गई थी। अंसारी तालिबान से जुड़े प्रमुख धार्मिक नेताओं में से एक थे। मौलवी मुजीब रहमान अंसारी को तालिबान का करीबी और एक कट्टरपंथी मौलवी माना जाता था। हेरात के गर्वनर ने अपने इस बयान में इसे भी आत्मघाती हमला बताया था। 

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6 सितंबर :
कहां - रूसी एम्बेसी 
मौतें - 20 

काबुल के दारुल अमन इलाके में रूसी एम्बेसी के बाहर फिदायीन हमले में 2 रूसी अधिकारियों समेत 20 लोगों की मौत हो गई थी। ये भी एक आत्मघाती हमला था। धमाके के दौरान कुछ अफगानी नागरिक वीजा बनवाने के लिए रूसी ऐंबेसी के बाहर पहुंचे थे। एम्बेसी में तैनात गार्ड ने बताया था एक संदिग्ध पर फायरिंग के तुरंत बाद उसने खुद को उड़ा दिया।

30 सितंबर : 
कहां - काज कोचिंग सेंटर, काबुल 
मौतें - 20 

काबुल के एजुकेशन इंस्टीट्यूट में शुक्रवार को धमाका हुआ। अफगानिस्तान के एक जर्नलिस्ट बिलाल सरवरी ने 100 स्टूडेंट्स की मौत का दावा किया है। सरवरी के मुताबिक, तालिबान ने हॉस्पिटल के मालिक को धमकी दी है कि वो कोई भी जानकारी मीडिया को लीक न करे।

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