दरअसल, चीन, दक्षिण चीन सागर के 80% से अधिक हिस्से पर दावा करता है। वह अपने 1947 के मैप के साथ अपने दावे का समर्थन करता है जो अस्पष्ट डैश दिखाता है।

Indo-China Faceoff: भारत के क्षेत्र को अपने नए नक्शे में शामिल करने की चीन की साजिश के बाद एशिया के चार अन्य देशों ने भी ड्रैगन की आलोचना की है। दरअसल, चीन ने बीते दिनों जारी अपने नए मैप में भारतीय क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अपना बताया था। चीन ने नया मैप, पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की दक्षिण अफ्रीका में मुलाकात के कई दिनों बाद जारी कर नया बवाल खड़ा कर दिया है।

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वियतनाम सहित कई देशों ने किया नए नक्शे को खारिज

भारत के अलावा वियतनाम ने भी नए मैप को खारिज कर दिया है। वियतनाम ने कहा कि चीन द्वारा जारी किया गया अधिकारिक नक्शा स्प्रैटली और पारासेल द्वीपों पर उसकी संप्रभुता और उसके जल क्षेत्र पर अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करता है। वियतनाम के विदेश मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता फाम थू हैंग ने कहा कि मानचित्र पर नौ-बिंदु रेखा के आधार पर चीन की संप्रभुता और समुद्री दावे अमान्य हैं। हैंग ने बयान में कहा कि वियतनाम बिंदीदार रेखा के आधार पर दक्षिण चीन सागर में चीन के सभी दावों का दृढ़ता से विरोध करता है।

फिलीपींस, मलेशिया, ताइवान ने भी किया नए मैप का विरोध

फिलीपींस ने भी चीन के नए मैप का विरोध किया है। फिलीपींस ने कहा कि वह दक्षिण चीन सागर में चीन के व्यापक दावों को मान्यता नहीं देता है। मलेशिया और ताइवान की सरकारों ने भी बीजिंग पर उनके क्षेत्र पर दावा करने का आरोप लगाते हुए कड़े शब्दों में बयान जारी किए हैं।

दक्षिण चीन सागर के 80 प्रतिशत पर चीनी दावा

दरअसल, चीन, दक्षिण चीन सागर के 80% से अधिक हिस्से पर दावा करता है। वह अपने 1947 के मैप के साथ अपने दावे का समर्थन करता है जो अस्पष्ट डैश दिखाता है। इसमें नौ-डैश लाइन - जो हैनान द्वीप के दक्षिण में लगभग 1,100 मील (1,800 किलोमीटर) की दूरी पर स्थित है। जबकि वियतनाम, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और ताइवान एक ही समुद्री क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर दावा करते हैं। इन हिस्सों में सीमाएं पड़ती है जिसकी वजह से चीन के साथ उनका विवाद है।

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