Israel Iran War: अमेरिका की मध्यस्थता से इज़राइल और ईरान के बीच युद्धविराम लागू। नेतन्याहू ने ट्रंप को धन्यवाद दिया, लेकिन युद्धविराम के बाद भी हमले जारी रहे।

Israel Iran Ceasefire: इजरायल ने आधिकारिक रूप से ईरान के साथ युद्ध विराम स्वीकार कर लिया है। युद्ध विराम प्रस्ताव अमेरिका द्वारा लाया गया था। इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि ईरानी परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल खतरे को समाप्त कर दिया गया है। नेतन्याहू ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया गया तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।

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नेतन्याहू ने ईरान के हमले से बचाव में साथ देने और ईरानी परमाणु खतरे को दूर करने में भागीदारी के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद दिया। इससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर घोषणा की थी कि इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष विराम समझौता हो गया है। 12 दिन से चली आ रही लड़ाई खत्म हो गई है।

हालांकि ट्रंप की घोषणा के बाद भी इजरायल और ईरान ने एक दूसरे पर हमला किया। इजरायल के हवाई हमले में ईरान में 9 लोगों की मौत हो गई। दूसरी ओर ईरान द्वारा चार बार में मिसाइलों के झुंड इजरायल पर दागे गए। एक मिसाइल आवासीय इमारत पर गिरा, जिसके चलते तीन लोगों की मौत हो गई।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- खत्म हुआ इजरायल ईरान युद्ध

इजरायली प्रधानमंत्री ने यह बयान ट्रंप द्वारा दुनिया के सामने इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष विराम समझौते की घोषणा के कुछ घंटों बाद आया। ट्रंप ने कहा कि 12 दिन से चल रहा युद्ध समाप्त हो गया है। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर ट्रंप ने कहा कि इजरायल और ईरान अपने "अंतिम मिशन" के खत्म होने के बाद युद्ध विराम शुरू करेंगे।

ईरान तुरंत युद्ध विराम स्वीकार करने के लिए उत्सुक नहीं था। ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि इस तरह के किसी भी सौदे पर सहमति नहीं बनी है। हालांकि, कुछ ही देर बाद वह यू-टर्न लेते दिखे। ईरानी सरकारी टीवी ने बाद में पुष्टि की कि युद्ध विराम शुरू हो गया है।

13 जून को हुई इजरायल-ईरान जंग की शुरुआत

बता दें कि इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई की शुरुआत 13 जून को हुई थी। इससे पहले से ही दोनों देशों के संबंध बेहद तनाव में थे। इजरायल ने 13 जून को ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य स्थलों पर हवाई हमला किया। उसका निशाना ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम और सैन्य नेतृत्व था। ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से हमला कर जवाब दिया। इसके बाद से दोनों देश एक दूसरे पर अटैक कर रहे थे।