MQM के संस्थापक अल्ताफ हुसैन ने शाहिद अजीज की जेल में हुई हत्या की निंदा की है। उन्होंने यूएन, एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को इसका संज्ञान लेने की अपील की है। 

इस्लामाबाद। मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के कार्यकर्ता शाहिद अजीज की कराची जेल में प्रताड़ना से मौत हो गई है। शाहिद को फर्जी केस में फंसाकर गलत ढंग से चार सालों से जेल में रखा गया था। जेल में उन पर लगातार शारीरिक व मानसिक टार्चर किया जा रहा था।

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गिरफ्तारी के सात महीने तक अज्ञात जगह पर रखा

एमक्यूएम के नेता शाहिद अजीज को 2017 में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन उनकी गिरफ्तारी को पाकिस्तानी अधिकारी लगातार नकारते रहे। करीब सात महीने तक उनको अज्ञात जगह पर किसी डिटेंशन सेंटर पर रखा गया था। हालांकि, सात महीने बाद उनकी गिरफ्तारी दिखाई गई और कराची सेंट्रल जेल में लाया गया। अरेस्ट के दौरान उन पर कई फेक केस दर्ज किए गए। 

चार साल से जेल में शाहिद, लेकिन कोई भी अपराध साबित नहीं

शाहिद चार साल से पाकिस्तान की जेल में थे। चार साल के दौरान उन पर पाकिस्तान की अथारिटी एक भी एंटी-सोशल एक्टिविटी या किसी अपराध में शामिल होना साबित नहीं कर सकी थी। 

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टार्चर से दिन ब दिन हालत हो रही थी खराब 

एमक्यूएम नेता शाहिद की हालत टार्चर की वजह से लगातार बिगड़ती जा रही थी। लेकिन वह किसी प्रकार का मेडिकल असिस्टेंस लेने से इनकार कर दे रहे थे। 

दो महीने पहले जेल से निकाल कर 15 दिनों तक रिमांड पर रहे

दो महीने पहले शाहिद को जेल से निकाला कर 15 दिनों के पुलिस रिमांड पर दिया गया। इन 15 दिनों में में उन पर खूब जुल्म ढाए गए। इसके बाद उनको फिर से जेल में ट्रांसफर कर दिया गया। 

एमनेस्टी इंटरनेशनल, यूएन के संज्ञान में लाया मामला

एमक्यूएम के संस्थापक अल्ताफ हुसैन ने शाहिद अजीज की जेल में हुई हत्या की निंदा की है। उन्होंने यूएन, एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को इसका संज्ञान लेने की अपील की है। 

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