NIA ने म्यांमार में आतंकी समूहों को ड्रोन और सैन्य ट्रेनिंग देने के आरोप में 5 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। आरोपी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए और मिजोरम के रास्ते म्यांमार गए थे। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया है।
नई दिल्ली [भारत], 3 जुलाई (एएनआई): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को आतंकी और लड़ाकू ट्रेनिंग देने के आरोप में 5 यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। इन सभी को शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया।

आरोप है कि ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे और फिर मिजोरम के रास्ते म्यांमार गए, जहां वे म्यांमार की सैन्य सरकार के खिलाफ लड़ रहे जातीय सशस्त्र समूहों के संपर्क में आए। एनआईए ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने ऐसे समूहों को ड्रोन युद्ध और अन्य सैन्य तकनीकों से संबंधित ट्रेनिंग और सहायता प्रदान की, जिससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंताएं पैदा हो गईं। आरोपी व्यक्ति फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और जांच जारी है।
वॉयस सैंपल की मांगी गई थी इजाजत
इससे पहले जून में, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कथित म्यांमार ट्रेनिंग मॉड्यूल मामले में गिरफ्तार सभी आरोपियों के वॉयस सैंपल लेने की अनुमति के लिए पटियाला हाउस की एक विशेष एनआईए अदालत का रुख किया था। यह कदम गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोपी विदेशी नागरिकों से जुड़े एक कथित अंतरराष्ट्रीय साजिश की चल रही जांच का हिस्सा है।
एनआईए के अनुसार, यह मामला गृह मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के तहत 13 मार्च, 2026 को यूएपीए की धारा 18 के तहत दर्ज किया गया था। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि विदेशी नागरिकों का एक समूह टूरिस्ट वीजा पर भारत आया, मिजोरम गया और बाद में बिना जरूरी परमिट के म्यांमार में घुस गया, जहां उन्होंने कथित तौर पर म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों (ईएजी) को ड्रोन युद्ध, ड्रोन संचालन, असेंबली और जैमिंग तकनीक में ट्रेनिंग दी।
जांच के लिए NIA ने मांगा और वक्त
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब एनआईए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों - हर्बा पेट्रो, स्लिवियाक तारस, इवान सुकमानोवस्की, स्टेफनकिव मारियन, होंचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर सहित सात गिरफ्तार विदेशी नागरिकों के खिलाफ अपनी जांच पूरी करने के लिए समय बढ़ाने की मांग कर रही है। एजेंसी ने यूएपीए के तहत वैधानिक जांच अवधि को 90 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन करने की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि जांच एक 'गहरी आपराधिक साजिश' से संबंधित है, जिसके तार पूरे भारत और विदेशों तक जुड़े हैं।
एनआईए ने अदालत को सूचित किया है कि जांच एक महत्वपूर्ण चरण में है और जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विश्लेषण करने, वित्तीय लेनदेन की जांच करने, फंडिंग स्रोतों का पता लगाने और बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं और फॉरेंसिक विश्लेषण अभी भी चल रहा है। एनआईए ने कई बैंक खातों और वित्तीय चैनलों की भी पहचान की है, जिनका कथित तौर पर आरोपी व्यक्तियों द्वारा उपयोग किया गया था, और कहा है कि अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने से पहले विस्तृत वित्तीय जांच आवश्यक है।
एनआईए ने आगे तर्क दिया है कि इस स्तर पर आरोपी व्यक्तियों की रिहाई से जांच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, यह आरोप लगाते हुए कि वे अधिकार क्षेत्र से भाग सकते हैं या गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। समय बढ़ाने की कार्यवाही में विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी, अमित रोहिला के साथ एनआईए की ओर से पेश हुए। एडवोकेट नितिन सलूजा ने यूक्रेनी नागरिकों का प्रतिनिधित्व किया, जबकि एडवोकेट रोहित डांडरियाल और रोहित गौर ने वैन डाइक का पक्ष रखा। (एएनआई)
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