सुसाइड मशीन (Suicide machine) को एक ताबूत (Coffin) की तरह बनाया गया है। कांच के कैप्सूल (Capsule) के आकार की मशीन के अंदर जाने वाले का ऑक्सीजन (Oxigen) लेवल पलक झपकते ही गंभीर स्थिति तक कम हो जाता है।

स्विटजरलैंड ने सारको नामक एक 'सुसाइड मशीन' (Suicide Machine) को देश में मंजूरी दी है। यह हाइपोक्सिया और हाइपोकेपनिया (ऑक्सीजन आपूर्ति कम करने और खून में कार्बन डाइऑक्साइड को बढ़ाना) बढ़ाती है। इसकी मदद से कोई भी इंसान दर्द रहित तरीके से आत्महत्या कर सकता है। हालांकि, इस मशीन का इस्तेमाल वही लोग कर सकेंगे, जिन्हें इच्छामृत्यु की इजाजत मिली हो। सुसाइड मशीन को एक ताबूत (Coffin) की तरह बनाया गया है। कांच के कैप्सूल के आकार की मशीन के अंदर जाने वाले का ऑक्सीजन स्तर पलक झपकते ही गंभीर स्थिति तक कम हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में एक मिनट से कम समय में व्यक्ति की मौत हो जाती है और दर्द भी नहीं होता। खबरों के मुताबिक स्विट्जरलैंड में सरको मशीन (Sarco Machine) की कानूनी जांच पूरी होने के बाद 2022 से देश में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। 

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सुसाइड की इस लेटेस्ट मशीन पर छिड़ी बहस 
यह सुसाइड टेक्नोलॉजी का सबसे नया उदाहरण है, जो विशेष रूप से ऐसे उपकरण हैं जो किसी व्यक्ति को उन देशों में कम से कम दर्द के साथ जल्दी से मरने की अनुमति देते हैं जहां स्वैच्छिक इच्छामृत्यु या सहायता प्राप्त आत्महत्या कानूनी है।
हालांकि, इच्छामृत्यु की नैतिकता और इस तरह के उपकरणों के इस्तेमाल के बारे में एक बहस चल रही है। कई ऐसे देश हैं, जिन्होंने स्वैच्छिक मृत्यु को कानूनी रूप से बीमार रोगियों को ध्यान में रखते हुए वैध कर दिया है। यहां डॉक्टर या मृत्यु के इच्छुक व्यक्ति की सिफारिश पर इसकी अनुमति मिल जाती है। 

स्विटजरलैंड में पिछले साल 1300 लोगों ने मांगी इच्छामृत्यु
उदाहरण के लिए स्विटजरलैंड में इस तरह के सुसाइड को वैधता मिली है। पिछले साल लगभग 1,300 लोगों ने इस तरह से इच्छामृत्यु का सहारा लिया। हालांकि, वहां डीप कोमा में ले जाने के लिए निगलने योग्य तरल बार्बिट्यूरेट दवाओं का उपयोग किया जाता है, जिसके बाद मृत्यु हो जाती है।

डॉ. डेथ ने किया सुसाइड मशीन का आविष्कार 
सरको डिवाइस एक स्टैंड पर रखा गया एक 3डी-प्रिंटेड कैप्सूल (ताबूत) ​​होता है। इसमें नाइट्रोजन गैस बहती रहती है। जैसे ही कोई अंदर जाता है नाइट्रोजन के कारण व्यक्ति की ऑक्सीजन बहुत कम हो जाती है। यह इतनी तेजी से काम करता है कि बेहोश होने से पहले व्यक्ति छटपटाता भी नहीं है। ऐसा खून में भारी कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति के कारण होता है। सारको का आविष्कार फिलिप निट्स्के (डॉ. डेथ) ने 2017 में किया था। 2021 में इस मशीन को कानूनी रूप से वैधता मिल पाई है। 

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