भारत सरकार ने सोमवार को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 लागू किया, जिससे 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने का काम करेगा।

पाकिस्तान। पाकिस्तान ने गुरुवार (14 मार्च) को भारत के नए नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) को भेदभावपूर्ण प्रवृति का करार दिया। पाकिस्तान ने दावा किया कि ये लोगों के बीच उनकी आस्था के आधार पर भेदभाव करता है। भारत सरकार ने सोमवार को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 लागू किया, जिससे 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने का काम करेगा। अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान CAA पर टिप्पणी करते हुए पाकिस्तान विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज ज़हरा बलूच ने कहा कि जाहिर तौर पर कानून प्रासंगिक रूप से भेदभाव करता है।

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पाकिस्तानी विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज ज़हरा बलूच ने आरोप लगाया ये नियम और कानून गलत धारणा पर आधारित हैं कि क्षेत्र के मुस्लिम देशों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है और भारत को अल्पसंख्यकों के लिए एक सुरक्षित आश्रय माना जा रहा है।"उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की संसद ने 16 दिसंबर 2019 को कानून की आलोचना करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया, जिसे उसने समानता और गैर-भेदभाव के अंतरराष्ट्रीय मानदंडों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के खिलाफ बताया।

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अमेरिका ने CAA को लेकर चिंता जाहिर की

बता दें कि पाकिस्तान से पहले अमेरिका ने CAA को लेकर चिंता जाहिर की। अमेरिका ने इस मुद्दे पर कहा कि वो इसे लागू करने की प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखेगा। आपको बता दें कि बीजेपी शासित केंद्र सरकार ने देश की जनता को आश्वस्त किया है कि CAA एक तरह का ऐसा कानून है, जो नागरिकता देने का काम करता है, न की किसी की नागरिकता को छीनने का काम करा है। इस पर गृह मंत्री ने भी कहा कि CAA पूरी तरह से सवैंधानिक कानून है। इससे किसी को डरने की जरूरत नहीं है, खासकर मुस्लिम वर्ग के लोगों को।

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