गाज़ा में पारले-जी बिस्किट ₹2,342 में बिक रहा है! जानिए, कैसे भारत का आम बिस्किट वहां 'लक्ज़री' बन गया और इसके पीछे की हैरान कर देने वाली कहानी।

भारत के घर-घर की पहचान, बचपन की यादों और चाय के साथी पारले-जी बिस्किट, जिसे कभी सस्ते और पौष्टिक स्नैक के रूप में जाना जाता था, आज गाज़ा में एक "लक्ज़री आइटम" बन गया है। गाज़ा से सामने आई एक वायरल पोस्ट के मुताबिक, एक पारले-जी बिस्किट का पैकेट 24 यूरो (करीब 2,342 रुपये) में बिक रहा है। ये वही बिस्किट है जिसे भारत में आज भी 5 रुपये से कम में खरीदा जा सकता है। गाज़ा में पारले-जी का 2,342 रुपये में बिकना सिर्फ एक खाद्य संकट नहीं, बल्कि भूख को हथियार बनाने की कहानी है। यह दिखाता है कि कैसे राहत सामग्री भी सामाजिक, सैन्य और राजनीतिक खेलों का हिस्सा बन जाती है। जहां भारत में पारले-जी बचपन की यादों, सरलता और समानता का प्रतीक है, वहीं गाज़ा में यह संघर्ष, असमानता और काले बाजार की पहचान बन गया है।

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किसने क्या कहा?

एक गाज़ा निवासी ने पोस्ट में लिखा:

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“लंबे इंतज़ार के बाद, मैं आखिरकार रफीफ के लिए उसके पसंदीदा बिस्किट ला सका। कीमत भले ही 1.5 यूरो से 24 यूरो हो गई हो, पर मैं उसकी खुशी के लिए यह खर्च करने से नहीं झिझका।”

गाज़ा में ‘भूखमरी’ का कारण

  • अक्टूबर 2023 में युद्ध के बाद, इज़राइल की सैन्य कार्रवाई के चलते गाज़ा में खाद्य आपूर्ति लगभग पूरी तरह बंद कर दी गई।
  • 2 मार्च से 19 मई 2025 तक सीमाएं बंद रहीं। बहुत ही सीमित संख्या में मानवीय सहायता की गाड़ियां अंदर जा सकीं।
  • संयुक्त राष्ट्र की खाद्य आपूर्ति पर भी रोक लगा दी गई।
  • इसकी जगह 27 मई को नया सिस्टम शुरू किया गया: Secure Distribution Site 1 (SDS1)

Secure Distribution Site 1 (SDS1) क्या है?

  • यह प्रणाली अमेरिका, इज़राइल और स्विट्ज़रलैंड के समर्थन से चलाई जा रही है।
  • यह रफ़ा शहर में स्थित है, जिसमें जालीदार गलियों में लोगों को लाइन में खड़ा कर दिया जाता है।
  • सुरक्षा Safe Reach Solutions नाम की एक अमेरिकी निजी एजेंसी करती है, जिस पर इज़रायली डाटा के जरिए निगरानी का आरोप है।
  • ब्लैक में बिक रहे हैं राहत सामग्री के बिस्किट

डॉक्टर खालिद अलशावा (गाज़ा सिटी के सर्जन) का बयान:

  • “ये बिस्किट आम तौर पर राहत सामग्री के रूप में मुफ्त आते हैं, लेकिन इन्हें केवल चुनिंदा लोग ही पाते हैं। फिर इन्हें काले बाजार में बेहद महंगे दामों पर बेचा जाता है।”
  • उन्होंने खुद एक पैकेट 240 रुपये में खरीदा, जबकि कई जगह 2,000 रुपये से भी ज्यादा में बिक रहे हैं।
  • इन बिस्किट्स पर "EXPORT PACK" लिखा होता है, लेकिन कोई मूल्य नहीं लिखा होता है।

गाज़ा में कुछ जरूरी चीजों के रेट (INR में):

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  • 1 किलो शक्कर-₹4,914
  • 1 लीटर तेल-₹4,177
  • 1 किलो आलू-₹1,965
  • 1 किलो प्याज-₹4,423
  • 1 कप कॉफी-₹1,800
  • 1 इस्राइली शेकेल = ₹24.57 (भारतीय मुद्रा)

पारले-जी क्यों मायने रखता है?

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  • 1938 में शुरू हुआ, पारले-जी स्वदेशी आंदोलन का हिस्सा था। ब्रिटिश स्नैक्स के महंगे विकल्पों के मुकाबले यह भारत का अपना, सस्ता और पौष्टिक विकल्प था।
  • ये ‘नेशनल इक्वलाइज़र’ बना — हर वर्ग के लोग इसे खा सकते थे।
  • आज भी, Shrinkflation के बावजूद, पारले-जी सबसे सस्ता पैक्ड स्नैक माना जाता है। (पहले 100 ग्राम ₹5 में मिलते थे, अब 55 ग्राम में मिलते हैं)
  • 2013 में यह भारत का पहला FMCG ब्रांड बना जिसने ₹5,000 करोड़ की बिक्री पार की।
  • 2011 में, Nielsen के अनुसार, यह दुनिया का सबसे ज़्यादा बिकने वाला बिस्किट था।