Pew Research के अनुसार, इस्लाम दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला धर्म है। 2020 तक दुनिया की 25% आबादी मुस्लिम हो गई, और 2050 तक यह 34% तक पहुंचने का अनुमान है। गैर-मुस्लिम आबादी की तुलना में मुस्लिम आबादी में वृद्धि दर काफी अधिक है।

Pew Research Report: दुनियाभर में सामाजिक मुद्दों, पब्लिक ओपिनियन और डेमोग्राफिक ट्रेंड्स पर रिसर्च करने वाले थिंकटैंक प्यू रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लाम दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता रिलीजन है। 2010 से 2020 के बीच, मुस्लिम आबादी 170 करोड़ से बढ़कर 200 करोड़ के पार पहुंच गई है। यानी 10 साल के दौरान इसमें करीब 20% की बढ़ोतरी हुई है।

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दुनिया का हर चौथा शख्स मुस्लिम

प्यू रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल दुनिया का हर चौथा इंसान मुस्लिम है। पूरी दुनिया की आबादी अभी 800 करोड़ है, जिसमें 200 करोड़ मुस्लिम हैं। यानी विश्व में इस्लाम मानने वाले अब 25% हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2050 तक पूरी दुनिया में मुस्लिम आबादी बढ़कर 34% तक पहुंच जाएगी।

10 साल में सिर्फ 9.7% बढ़ी गैर-मुस्लिम आबादी

प्यू रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, 2010 से 2020 के बीच जहां इस्लाम को मानने वाले लोगों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ी, वहीं गैर-मुस्लिमों की आबादी में सिर्फ 9.7% की बढ़ोतरी हुई। इसमें हिंदुओं की जनसंख्या में 0.1% की कमी आई है। 2010 में हिंदुओं की आबादी 15% थी, जो 2020 में घटकर 14.9% रह गई।

दुनिया के किस इलाके में बढ़ी सबसे ज्यादा मुस्लिम जनसंख्या

रिपोर्ट के मुताबिक, 2010 से 2020 के बीच यानी 10 साल में मुस्लिमों की जनसंख्या सबसे ज्यादा नॉर्थ अमेरिका में बढ़ी। यहां मुस्लिम आबादी में 52% का इजाफा देखा गया। यहां कुल मुस्लिम आबादी 59 लाख है। इसके अलावा सब सहारा अफ्रीका में मुस्लिम आबादी 34% बढ़ी। वहीं, एशिया-प्रशांत रीजन में मुस्लिमों की जनसंख्या में 1.4% का इजाफा देखा गया। यूरोप में इमिग्रेशन के चलते मुस्लिम आबादी में 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

2050 तक दुनिया के इस हिस्से में घट जाएंगे मुस्लिम

ग्लोबल थिंक टैंक प्यू रिसर्च की 'द फ्यूचर ऑफ वर्ल्ड रिलीजन' रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 25 सालों में यानी 2050 तक इस्लाम ग्लोबल लेवल पर तेजी से बढ़ेगा, लेकिन एशिया पैसिफिक रीजन (एशिया-प्रशांत इलाके) में मुस्लिम आबादी में कमी आएगी। इस रीजन में 2010 तक मुस्लिम आबादी 61.7% थी, जो 2050 तक घटकर 52.8 फीसदी रहने का अनुमान है। सर्वे में कहा गया है कि फर्टिलिटी रेट, शहरीकरण और कन्वर्जन जैसे कई सोशल-इकोनॉमिक कारणों के चलते ऐसा होगा।