पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी (Bilawal Bhutto Zardari) ने यासीन मलिक की रिहाई की मांग की है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाचेलेट को पत्र लिखा है।

इस्लामाबाद। एनआईए कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख मोहम्मद यासीन मलिक (Yasin Malik) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यासीन मलिक को सजा मिलने से पाकिस्तान तिलमिला गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि आज का दिन भारतीय लोकतंत्र और उसकी न्याय प्रणाली के लिए काला दिन है। भारत यासीन मलिक को शारीरिक रूप से कैद कर सकता है, लेकिन वह स्वतंत्रता के उस विचार को कैद नहीं कर सकता, जिसका वह प्रतीक है। 

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वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी (Bilawal Bhutto Zardari) ने यासीन मलिक की रिहाई की मांग की है। बिलावल भुट्टो ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाचेलेट को पत्र लिखकर भारत से यासीन मलिक को सभी आरोपों से बरी करने और उसकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है ताकि वह अपने परिवार के साथ फिर से मिल सके। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा कि विदेश मंत्री ने कश्मीर की स्थिति की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने के लिए बाचेलेट को पत्र भेजा है।

जेल से रिहाई कराने का किया आग्रह 
बिलावल भुट्टो ने उच्चायुक्त और मानवाधिकार परिषद से भारत से मलिक को सभी निराधार आरोपों से बरी कराने और जेल से उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित कराने का आग्रह किया है ताकि वह अपने परिवार के साथ फिर से मिल सके, अपने स्वास्थ्य को ठीक कर सके और सामान्य जीवन में लौट सके। बिलावल अलग से OIC के महासचिव हिसेन ब्राहिम ताहा को पत्र लिखकर कश्मीर की स्थिति से अवगत कराया है।

पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक और भारत में राजदूत रह चुके अब्दुल बासित ने कहा है कि यह ज्युडिशियल टेरेरिज्म है। अब्दुल बासित ने दुनिया से गुहार लगाई है कि वे भारत के खिलाफ खड़े हों। उन्होंने कहा है कि दुनिया के देशों को भारत के गैर जिम्मेदार रवैये के विरोध में सामने आना चाहिए। 

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इमरान खान ने कहा-यह फासीवाद
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने यासीन मलिक को सजा सुनाए जाने पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे फासीवाद बताया है। इमरान ने कहा कि वे यासीन मलिक के खिलाफ मोदी सरकार की फासीवादी रणनीति की निंदा करते हैं। 

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