श्रीलंका में कोयला बिजली संयत्र बंद पड़े हैं। अघोषित बिजली कटौती बेतहाशा बढ़ी है। घरों में रसोई गैस और केरोसिन तेल के लिए लोग संघर्ष कर रहे हैं। चावल, ऑटोमोटिव पार्ट्स और सीमेंट की कमी भी देखी जा रही है। सुपरमार्केट्स को कुछ मुख्य खाद्य पदार्थों को राशन के लिए मजबूर किया गया है। 

कोलंबो। श्रीलंका (Sri Lanka) को बुधवार को ऊर्जा की कमी और रोलिंग ब्लैकआउट (Blackout) से अस्थायी राहत मिली है। भारत (India) ने श्रीलंका को 500 मिलियन डॉलर की मदद तत्काल तेल खरीद के लिए दी है। श्रीलंका इन दिनों नकदी संकट से गुजर रहा है। आर्थिक संकट से गुजर रहे देश में व्यापारियों के पास आयात करने के लिए निधि नहीं है जिसकी वजह से थर्मल पावर जनरेटर्स और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बाधित है।

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श्रीलंका में बिगड़े हालात

श्रीलंका में कोयला बिजली संयत्र बंद पड़े हैं। अघोषित बिजली कटौती बेतहाशा बढ़ी है। घरों में रसोई गैस और केरोसिन तेल के लिए लोग संघर्ष कर रहे हैं। श्रीलंका में चावल, ऑटोमोटिव पार्ट्स और सीमेंट की कमी भी देखी जा रही है। सुपरमार्केट्स को कुछ मुख्य खाद्य पदार्थों को राशन के लिए मजबूर किया गया है। इस कमी ने पिछले महीने खाद्य मुद्रास्फीति को रिकॉर्ड 25 प्रतिशत तक पहुंचा दिया।

भारत ने की मदद

अधिकारियों ने कहा कि दो सप्ताह की बातचीत के बाद बुधवार को एक औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया। इसके अलावा हाल ही में 915 मिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा सहायता भी दी गई है। एक भारतीय राजनयिक ने कहा कि भारत से तत्काल आवश्यक खाद्य और दवा आयात के लिए एक अरब डॉलर की क्रेडिट लाइन पर बातचीत हुई। अधिकारी ने बताया कि 500 मिलियन डॉलर श्रीलंका के लिए भारतीय आपूर्तिकर्ताओं से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने के लिए है।

पर्यटन से भी श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में मदद

पर्यटन श्रीलंका के लिए एक प्रमुख विदेशी मुद्रा के आय का साधन है। लेकिन कोविड -19 महामारी के मद्देनजर यह क्षेत्र भी बर्बाद हो चुका है। सरकार ने पैसे बचाने के लिए विदेशी राजनयिक मिशनों को बंद कर दिया है और विदेशी मुद्रा के संरक्षण के लिए आयात पर व्यापक प्रतिबंध लगभग दो वर्षों से लागू है।

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने किया डाउनग्रेड

तीन अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने पिछले साल के अंत से श्रीलंका को डाउनग्रेड कर दिया है। एजेंसियों ने यह कदम इस डर से उठाया कि यह अपने 35 बिलियन डॉलर के सरकारी ऋण को चुकाने में सक्षम नहीं हो सकता है। श्रीलंका ने अपने मौजूदा चीनी ऋण को चुकाने में मदद करने के लिए बीजिंग से और ऋण मांगे हैं, जो देश के बाहरी उधार का लगभग 10 प्रतिशत है। अधिकारियों ने अतीत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए चीन से भारी उधार लिया है।

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