अमेरिका में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक नर्स फाइजर वैक्सीन का टीका लगने के 8 दिन बाद कोरोना संक्रमित हो गई। मैथ्यू डब्ल्यू सैन डिएगो में नर्स हैं, उन्हें 18 दिसंबर को कोरोना का टीका लगाया गया था। 

वॉशिंगटन . अमेरिका में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक नर्स फाइजर वैक्सीन का टीका लगने के 8 दिन बाद कोरोना संक्रमित हो गई। मैथ्यू डब्ल्यू सैन डिएगो में नर्स हैं, उन्हें 18 दिसंबर को कोरोना का टीका लगाया गया था। 

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एबीसी 10 न्यूज से बातचीत में मैथ्यू ने बताया कि उन्हें वैक्सीन लगाने के बाद उनके हाथ में दर्द महसूस हुआ था। लेकिन इसके अलावा कोई अन्य साइड इफेक्ट नहीं थे। वहीं, इसके 6 दिन बाद वे बीमार पड़ गईं। 

मैथ्यू की हालत अब ठीक
उन्होंने बताया, उन्हें ठंड लगने लगी। बाद में मांसपेशियों में दर्द और थकान महसूस हुई। इसके बाद उन्होंने कोरोना टेस्ट कराया। वे पॉजिटिव पाई गईं। मैथ्यू की हालत में अब सुधार है, उनमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं है। हालांकि, अभी वे थकी हुई महसूस करती हैं।

- वैक्सीन लगने के कितने दिन बाद असर दिखाना शुरू करती है? 

कोरोना वैक्सीन लगने के बाद मैथ्यू का संक्रमित होना तमाम तरह के सवाल खड़ा कर रहा है। हालांकि, सैन डिएगो में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ क्रिश्चियन रैमर का कहना है कि ऐसे मामले अप्रत्याशित नहीं हैं। क्रिश्चियन रैमर के मुताबिक, यह भी संभव है कि मैथ्यू कोरोना वैक्सीन लगने के पहले संक्रमित हुई हों। क्यों कि कोरोना संक्रमण की अवधि 2 हफ्ते तक है। उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि वैक्सीन लगने के बाद सुरक्षा विकसित होने में करीब 10-14 दिन लगते हैं। 

- अगर आप कोरोना संक्रमित हैं, और उसी दौरान वैक्सीन लगती है, तो क्या यह शरीर को सुरक्षा प्रदान कर सकती है? 

डॉ रैमर ने बताया कि अमेरिका में कई स्थानीय केस ऐसे सामने आए हैं, जब हेल्थ वर्कर्स वैक्सीन लगने के आसपास संक्रमित हुए हैं। रैमर के मुताबिक, सभी मामले इस तथ्य को दर्शाते हैं कि वैक्सीन से नतीजे तत्काल नहीं मिलते।

उन्होंने बताया, कोरोना वैक्सीन की दो डोज दी जाती हैं। पहली से 50% सुरक्षा मिलती है। जबकि दूसरी डोज लगने के बाद 95% तक सुरक्षा मिलती है। 

अमेरिका में फाइजर को मिली इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत
अमेरिका में दिसंबर में ही स्वास्थ्य एजेंसी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने फाइजर वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दे दी। इसे अमेरिका की फार्मास्युटिकल कंपनी फाइजर और जर्मनी की बायोटेक फर्म BioNTech ने बनाया है। कंपनी का दावा है कि यह वैक्सीन 90% से ज्यादा असरदार है।