चार दिन के तनाव के बाद भारत-पाक युद्धविराम पर राजी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम ने पर्दे के पीछे रहकर दोनों देशों को बातचीत के लिए राजी किया।

India Pakistan Tensions: चार दिन तक चले टकराव के बाद शनिवार को भारत और पाकिस्तान युद्ध विराम समझौते पर सहमत हुए। दोनों देशों को इस मुद्दे पर सहमत करने में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी सरकार के लोगों की बड़ी भूमिका रही है।

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CNN की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप प्रशासन के टॉप अधिकारी इस काम में जुटे थे। इनमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री और अंतरिम राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मार्को रुबियो और व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी विल्स शामिल थे। यह टीम भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संघर्ष पर बारीकी से नजर रख रही थी। शुक्रवार की सुबह अमेरिका को खतरनाक खुफिया जानकारी मिली थी।

जेडी वेंस ने 12 बजे नरेंद्र मोदी से की बात

यह खुफिया जानकारी क्या था और किस संबंध में थी, इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है। इसके बाद जेडी वेंस ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शुक्रवार दोपहर 12 बजे बात की। उन्होंने नरेंद्र मोदी को बताया कि व्हाइट हाउस का मानना ​​है कि सप्ताहांत तक संघर्ष जारी रहने के कारण नाटकीय रूप से तनाव बढ़ने की बहुत अधिक संभावना है। वेंस ने नरेंद्र मोदी से कहा कि वे भारत को पाकिस्तान से सीधे बातचीत करने दें और तनाव कम करने के लिए उपलब्ध विकल्पों पर विचार करें।

वेंस ने मोदी को बताया कैसे मानेगा पाकिस्तान

उस समय अमेरिका का मानना ​​था कि दोनों पक्ष बातचीत नहीं कर रहे थे। उन्हें फिर से बातचीत की मेज पर लाना था। वेंस ने मोदी को एक संभावित रास्ता भी बताया जिसके बारे में अमेरिका को लगता था कि पाकिस्तान इसके लिए तैयार है।

इस कॉल के बाद रुबियो सहित विदेश विभाग के अधिकारियों ने भारत और पाकिस्तान में अपने समकक्षों के साथ रात भर फोन पर बातचीत की। ट्रंप प्रशासन समझौते का मसौदा तैयार करने में शामिल नहीं था। उनकी भूमिका मुख्य रूप से दोनों पक्षों को बातचीत के लिए साथ लाने तक सीमित थी।