ब्रिटेन के बाद अब मंकीपॉक्स वायरस धीरे-धीरे अमेरिका में भी पैर पसारने लगा है। हाल ही में मैसाच्युसेट्स शहर में एक शख्स को मंकीपॉक्स हो गया है। बता दें कि यह बीमारी चेचक यानी स्मालपॉक्स की ही तरह है। लेकिन कुछ मामलों में ये जानलेवा भी साबित हो सकती है। 

Monkeypox Virus: कोरोना महामारी अभी खत्म भी नहीं हुई कि अब एक नया वायरस लोगों को डराने लगा है। इस वायरस का नाम मंकीपॉक्स (Monkeypox) है, जिसके लक्षण स्माल पॉक्स की तरह ही नजर आते हैं। पिछले कुछ वक्त से ब्रिटेन और यूरोप के कुछ देशों के बाद अब इस वायरस ने अमेरिका में भी दस्तक दे दी है। अमेरिका के मैसाचुसेट्स शहर एक शख्स में मंकीपॉक्स वायरस पाया गया है। ये शख्स कुछ दिनों पहले कनाडा गया था। आखिर क्या है मंकीपॉक्स, कितना खतरनाक है ये वायरस और क्या हैं इसके लक्षण..जानते हैं। 

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क्या है मंकीपॉक्स : 
मंकीपॉक्स (Monkeypox) भी स्मॉल पॉक्स यानी चेचक के वायरस का ही एक रूप है। मंकीपॉक्स वायरल 52 साल पहले 1970 में पहली बार एक बंदर में मिला था। इसके बाद यह वायरस वहां से 10 अफ्रीकी देशों में फैल गया। मंकीपॉक्स एक जूनोसिस (zoonosis) है। यानी एक ऐसी बीमारी जो संक्रमित जानवरों से मनुष्यों में फैलती है।

कैसे फैलता है मंकीपॉक्स : 
विशेषज्ञों के मुताबिक, मंकीपॉक्स (Monkeypox) इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति के करीब जाने से फैलता है। मंकीपॉक्स वायरस मरीज के घाव से निकलकर आंख, नाक और मुंह के रास्ते किसी भी शख्स के शरीर में जाकर उसे भी संक्रमित कर सकता है। यह वायरस संक्रमित बंदर और कुत्ते या फिर इस बीमारी से संक्रमित जानवरों से भी फैल सकता है। 

जानलेवा भी हो सकता है मंकीपॉक्स : 
मंकीपॉक्स (Monkeypox) वैसे तो आम चेचक की तरह ही होता है और इसके ज्यादातर मरीज कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। फिर भी 10 फीसदी मामलों में यह बीमारी जानलेवा साबित होती है। मंकीपॉक्स की खोज पहली बार 1958 में हुई थी, तब रिसर्च के लिए लाए गए बंदरों की में चेचक जैसी बीमारी मिली थी और इसके बाद ही इसका नाम 'मंकीपॉक्स' पड़ा। 

क्या है मंकीपॉक्स के लक्षण : 
मंकीपॉक्स (Monkeypox) के लक्षण आमतौर पर चेचक की तरह ही हैं। इसमें चेचक की तरह ही पूरे शरीर में दाने निकल आते हैं। इसकी वजह से बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, पीठ दर्द, और थकावट महसूस होती है। 

क्या है इलाज : 
मंकीपॉक्स (Monkeypox) भी स्मालपॉक्स वायरस की फैमिली का सदस्य है, इसलिए इस पर भी चेचक की वैक्सीन असरदार साबित होती है। चेचक की वैक्सीन 85% इस वायरस को रोकने में असरकारक है। वैसे, इस बीमारी को रोकने का सबसे अच्छा उपाय संक्रमित व्यक्ति और जानवरों से दूर रहना ही है। 

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