आर्मी चीफ ले.जन.वकार-उज़-ज़मान ने सोमवार दोपहर में अंतरिम सरकार बनाने ऐलान करते हुए लोगों को हिंसा छोड़ने और शांति कायम रखने की अपील की है। बांग्लादेश की कमान संभालने वाले आर्मी चीफ वकार-उज़-ज़मान कौन हैं, आईए जानते हैं... 

Who is Waker Uz Zaman: बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना देश छोड़ चुकी हैं। हजारों की संख्या में लोग पीएम के आधिकारिक आवास में घुसकर भयंकर तोड़फोड़ करने के बाद आग लगा दिए हैं। सेना ने देश की कमान संभाल ली है और शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया है। आर्मी चीफ ले.जन.वकार-उज़-ज़मान ने सोमवार दोपहर में अंतरिम सरकार बनाने ऐलान करते हुए लोगों को हिंसा छोड़ने और शांति कायम रखने की अपील की है। 

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दो महीना पहले बने आर्मी चीफ

ले.जन.वकार-उज़-ज़मान करीब दो महीना पहले ही देश के सर्वोच्च सैन्य पद पर विराजमान हुए थे। आर्मी चीफ बनने के बाद 11 जून 2024 को जनरल ज़मान को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ चुना गया था। 23 जून को पदभार संभालने वाले जनरल वकार-उज़-ज़मान का कार्यकाल अगले तीन साल तक का है। उन्होंने जनरल एसएफ सैफुद्दीन अहमद की जगह ली है। इंफैंट्री कॉर्प्स में बतौर अफसर 1985 से अपना करियर शुरू करने वाले जनरल ज़मान, बांग्लादेश डिफेंस सर्विसेस कमांड एंड स्टॉफ कॉलेज और यूके के ज्वाइंट सर्विसेस कमांड एंड स्टॉफ कॉलेज के एक्स स्टूडेंट रहे हैं। बांग्लादेश मिलिट्री एकेडमी में पढ़ाई करने वाले वकार-उज़-ज़मान ने बांग्लादेश के नेशनल यूनिवर्सिटी और लंदन यूनिवर्सिटी के किंग्स कॉलेज से डिफेंस स्टडीज में भी हायर डिग्री हासिल की है।

पर्सनल लाइफ

आर्मी हेडक्वार्टर में मिलिट्री सेक्रेटरी का पद संभाल चुके ज़मान की शादी सराहनाज़ कमालिका ज़मान के साथ हुई है। ज़मान दंपत्ति को दो बेटियां हैं-समिहा रईसा ज़मान और शायीरा इब्नत ज़मान। ले.जन.वकार-उज़-ज़मान का जन्म 16 सितंबर 1966 में शेरपुर में हुआ था।

दुनिया की टॉप 50 मिलिट्री में एक है बांग्लादेश की सेना

बांग्लादेश की सेना दुनिया के बेहद ताकतवर सेना में गिनी जाती है। दुनिया के 145 देशों में बांग्लादेश की सेना का 37वां स्थान है। यहां की सेना में 175000 सक्रिय सैनिक हैं। देश की सरकार यहां की रक्षा बजट पर 3.8 बिलियन डॉलर सालाना खर्च करती है।

लंबे समय तक देश की सत्ता पर काबिज रहने का इतिहास

बांग्लादेश की सेना पर लंबे समय तक देश की सत्ता संभालने का इतिहास रहा है। शेख मुजीबुर रहमान यानी बंगबंधु की सरकार का तख्तापलट 1975 में सेना ने कर दिया था। इसके बाद देश की सत्ता को करीब डेढ़ दशक तक सेना ने चलाया। 1975 से 1990 तक बांग्लादेश में सैन्य शासन रहा। 1991 में लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार बनी। एक बार फिर बांग्लादेश सैन्य शासन की ओर है।

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