हिंदू धर्म में बहुत-सी मान्यताएं और परंपराएं हैं। ऐसी ही एक परंपरा है कि चातुर्मास (देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक का समय) के दौरान हरी सब्जियां, मूली, बैंगन आदि नहीं खानी चाहिए। इससे स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।

उज्जैन. चातुर्मास समाप्त होने पर ये चीजें खाई जा सकती हैं। इस बार 8 नवंबर, शुक्रवार को चातुर्मास समाप्त हो चुका है। इस मौके पर आपको इस परंपरा के पीछे छिपे विज्ञान के बारे में बता रहे हैं, जो इस प्रकार है...

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चातुर्मास में क्यों नहीं खाते हरी सब्जियां...
- चातुर्मास में मूलत: बारिश का मौसम होता है। इस समय बादल और वर्षा के कारण सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर नहीं आ पाता।
- इस समय शरीर की पाचन शक्ति भी कम हो जाती है, जिससे शरीर थोड़ा कमजोर हो जाता है।
- नमी अधिक होने के कारण इस समय बैक्टीरिया-वायरस अधिक हो जाते हैं और हरी सब्जियां भी इनसे संक्रमित हो जाती हैं।
- आयुर्वेद के अनुसार, इस समय हरी सब्जी खाने से हमें हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं, इसलिए इस दौरान हरी सब्जियां, बैंगन आदि खाने की मनाही होती है।

चातुर्मास के बाद क्यों खा सकते हैं हरी सब्जियां…
- चातुर्मास खत्म होने के बाद मौसम में नमी कम हो जाती है और सूर्य की पर्याप्त रोशनी पृथ्वी पर आती है।
- ये मौसम बैक्टीरिया-वायरस जैसे सुक्ष्म जीवों के लिए प्रतिकूल होता है, इसलिए इस समय इनकी संख्या कम होने लगती है और हरी सब्जियां भी इनके संक्रमण से मुक्त हो जाती है।
- सूर्य की रोशनी और अनुकूल वातावरण से हमारी पाचन शक्ति भी बेहतर हो जाती है। यही कारण है कि चातुर्मास के बाद हरी सब्जियां खाई जा सकती हैं।