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Diwali 2021: दीपावली पर बंगाल में की जाती है देवी काली की पूजा, जानिए कारण और विधि

इस बार 4 नवंबर, गुरुवार को दीपावली (Diwali 2021) पर्व मनाया जाएगा। इस दिन मुख्य रूप से धन की देवी महालक्ष्मी की पूजा करने का विधान है, लेकिन देश के कुछ हिस्सों में इस दिन देवी लक्ष्मी की नहीं बल्कि देवी काली की पूजा करने की परंपरा है। ये परंपरा बंगाल, ओडिशा, असम और इसके आस-पास सटे क्षेत्रों में निभाई जाती है। इसे काली पूजा कहा जाता है।
 

Diwali 2021, devi kali is worshiped in West Bangal on this day, know the reason and process
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Ujjain, First Published Nov 3, 2021, 5:20 AM IST
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उज्जैन. बंगाल में शरदोत्सव का अंत काली पूजा से होता है। ये पूजा दीपावली पर की जाती है। एक तरफ जहां दस हाथ वालीं मां दुर्गा, संरक्षण और प्रगति की देवी हैं; वहीं, काली विनाश की देवी हैं। ऐसा भी माना जाता है कि स्वर्ग और पृथ्वी को क्रूर राक्षसों से बचाने के लिए काली का जन्म दुर्गा के माथे से हुआ था। बंगाल से सटे इलाकों में काली पूजा का विशेष महत्व है। आमतौर पर दीपावली पर देवी लक्ष्मी की पूजा होती है, लेकिन बंगाल में काली पूजा की जाती है।

क्या है इस परंपरा से जुड़ी कथा?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, राक्षसों का संहार करने के बाद भी महाकाली का क्रोध शांत नहीं हुआ तो मां काली के इस रौद्र रूप को शांत करने के लिए भगवान शिव स्वयं उनके चरणों में लेट गए थे। भगवान शिव को शरीर के स्पर्श मात्र से ही देवी महाकाली का क्रोध समाप्त हो गया। इसी की याद में उनके शांत रूप लक्ष्मी की पूजा की शुरुआत हुई जबकि इसी रात इनके रौद्र रूप काली की पूजा का विधान भी कुछ राज्यों में है।

इन जगहों पर होती है खास पूजा
भारत के अधिकतर राज्यों में दीपावली पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं लेकिन पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और असम जैसे राज्यों में इस दिन मां काली की विशेष पूजा होती है। यह मान्यता है कि इसी दिन काली 64,000 यागिनियों के साथ प्रकट हुई थीं। यह पूजा अर्धरात्रि में की जाती है। 

ये है पूजा विधि
- इस दिन सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनकर मां काली की प्रतीमा स्थापित करें, फिर तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। लाल गुड़हल के फूल मां को अर्पित करें।
- इसके बाद ओम् ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै मंत्र का 108 बार जाप करें। इस मंत्र के जाप से जीवन की समस्याएं दूर हो जाती हैं।
- काली पूजन में देवी मां को खिचड़ी, खीर, तली हुई सब्ज़ी का भोग लगाएं। मान्यता है कि काली मां भोग से प्रसन्न होकर सभी इच्छाएं पूरी करती हैं।

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