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Ganesh Utsav 2022: भूल से भी न करें श्रीगणेश के पीठ के दर्शन, नहीं तो पड़ेगा पछताना, जानें कारण

Ganesh Utsav 2022: भगवान श्रीगणेश की पूजा शुभ फल देने वाली मानी गई है। इनकी पूजा से हर तरह की कामना पूरी हो सकती है, वहीं संकटों से भी बचा जा सकता है। गणेश उत्सव के दौरान श्रीगणेश की पूजा विशेष मंत्र व स्तुतियों से करना चाहिए।

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First Published Sep 1, 2022, 10:59 AM IST

उज्जैन. हर बार की तरह इस बार भी 10 दिवसीय गणेश (Ganesh Chaturthi 2022) उत्सव शुरू हो चुका है, जो 31 अगस्त से 9 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस दौरान गणेश मंदिरों में भी भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। भगवान श्रीगणेश से जुड़ी कई मान्यताएं और परंपराएं हमारे समाज में प्रचलित हैं। उन्हीं में से एक ये भी है कि भूलकर भी कभी गणेशजी की पीठ के दर्शन नहीं करना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। ये मान्यता क्यों है और इसके पीछे क्या कारण है, आगे जानिए…

भगवान श्रीगणेश में स्थित हैं सभी देवता
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, गणेशजी की सूंड में धर्म का स्थान माना जाता है, कानों में ऋचाएं हैं, दाएं हाथ में वर और बाएं हाथ में अन्न का निवास है। पेट में सुख-समृद्धि और नाभि में ब्रह्मांड समाया है। उनके पैरों में सातों लोक और मस्तक पर ब्रह्मलोक का स्थान माना गया है। जब भी हम भगवान श्रीगणेश के दर्शन सामने से करते हैं तो इन सभी के दर्शन भी हमें अपने आप ही हो जाते हैं।

न करें पीठ के दर्शन
ज्योतिषाचार्य पं. शर्मा के अनुसार गणेशजी की पीठ पर अलक्ष्मी यानी दरिद्रता का निवास माना जाता है, इसलिए इनकी पीठ के दर्शन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में हमें भी गरीबी की सामन करना पड़ सकता है। अगर अंजाने में ऐसा हो जाए तो तुरंत श्रीगणेश से क्षमा याचना करनी चाहिए। गणेशजी की प्रतिमा इस तरह रखनी चाहिए कि उनके पीठे के दर्शन भूल से भी न हों।

कौन हैं अलक्ष्मी?
धर्म ग्रंथों में अलक्ष्मी के बारे में बताया गया है। पुराणों के अनुसार, अलक्ष्मी देवी लक्ष्मी की बड़ी बहन हैं। इनकी उत्पत्ति भी समुद्र मंथन से हुई थी। जहां देवी लक्ष्मी को सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है, इसके विपरीत देवी अलक्ष्मी को गरीबी और दरिद्रता की देवी कहा गया है। देवी अलक्ष्मी का विवाह उद्दालक नाम के मुनि से हुआ था। जिन घरों में साफ-सफाई नहीं होती और हमेशा वाद-विवाद होते रहते हैं, देवी अलक्ष्मी वहीं निवास करती हैं। धर्म ग्रंथों में इनकी पूजा की भी मनाही है।


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