जन्माष्टमी पर उपवास रखकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है।

उज्जैन. जन्माष्टमी पर उपवास रखकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। उपवास इसलिए किया जाता है ताकि भगवान की पूजा करते समय हमारा मन, शरीर और विचार तीनों शुद्ध रहें। जब साफ मन और अच्छे विचारों से पूजा की जाती है तो वो हमें भीतर तक शांति देती है। जन्माष्टमी पर उपवास रखने का महत्व सिर्फ कृष्ण के जन्म से जुड़ा नहीं है, इसके चार प्रमुख कारण हैं। 

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1) अष्टमी तिथि। अष्टमी तिथि को जया तिथि भी कहते हैं, यानी जीत दिलाने वाली तिथि। इस दिन उपवास के साथ भगवान की पूजा करने से सभी कामों में जीत मिलती है।
2) अष्टमी तिथि के स्वामी शिव हैं और इस दिन भगवान विष्णु ने अवतार लिया। ये एक साथ दो प्रमुख देवताओं की पूजा का दिन है।
3) निराहार या सिर्फ फलाहार पर रहने से शरीर की शुद्धि होती है, अन्न नहीं खाने से उपवास के दौरान सांसारिक विचार मन में नहीं आते हैं और मन भगवान में लगा रहता है।
4) भगवान श्रीकृष्ण के ज्ञान को अपने जीवन में उतारना। कोई भी ज्ञान बिना खुद को शुद्ध किए पाना संभव नहीं है, इसलिए इस दिन ना केवल अन्न का त्याग करना चाहिए, बल्कि असत्य, भौतिक सुख और हिंसा जैसे भावों से भी परहेज करना चाहिए।