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Mahakal Lok: 11 अक्टूबर को पीएम मोदी करेंगे ‘महाकाल लोक’ का लोकार्पण, श्रृद्धालु कब कर पाएंगे दर्शन?

Mahakal Corridor: मध्य प्रदेश के उज्जैन में बन रहे महाकाल कॉरिडोर का नाम बदलकर ‘महाकाल लोक’ कर दिया गया है। 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) इसका लोकार्पण करेंगे। 
 

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First Published Sep 29, 2022, 11:57 AM IST

उज्जैन. मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी कहे जाने वाले उज्जैन (Ujjain) में महाकाल ज्योतिर्लिंग (Mahakal Jyotirlinga Temple) मंदिर का विस्तारीकरण किया जा रहा है। पहले इसका नाम महाकाल कॉरिडोर था, बाद में इस प्रोजेक्ट का नाम महाकाल लोक कर दिया गया। 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi ) इस प्रोजेक्ट का लोकार्पण करेंगे और 12 अक्टूबर को इसे लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। इसके लिए सभी तैयारियां अंतिम चरण में है। पीएम मोदी के आने के चलते पुलिस-प्रशासन मुस्तैद है।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से 4 गुना है ये प्रोजेक्ट
महाकाल लोक प्रोजेक्ट कितना विशाल है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये 20 हेक्टेयर भूमि पर फैला है। इस पर केंद्र और राज्य सरकार ने लगभग 793 करोड़ खर्च किए गए हैं। जबकि अगर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की बात की बात की जाए तो उसका क्षेत्रफल मात्र 5 हेक्टेयर है। यहां लगभग 200 मूर्तियां और म्यूरल्स (भित्त चित्र) बनाए गए हैं, जो देखने में बहुत ही आकर्षक हैं। इन मूर्तियों शिव तांडव, त्रिपुरासुर वध आदि शामिल हैं।

ऐसे जान सकेंगे मूर्तियों की कहानी
महाकाल लोक में लगाई गई 200 मूर्तियां और भित्ति चित्र ग्रंथों में बताए गए अलग-अलग प्रसंगों और घटनाओं पर बनाए गए हैं। इनके नीचे एक खास क्यूआर कोड लगाया गया है जिसे स्कैन करते ही उसके बारे में पूरी जानकारी आपको कुछ ही सेकेंड में मिल जाएगी। अगर श्रद्धालु पूरी कहानी ऑडियो के माध्यम से जानना चाहते हैं तो महाकाल मंदिर के नंदी द्वार के सामने बने ऑफिस से ऑडियो डिवाइस लेना होगा, जिससे स्कैन करते से ही पूरी कथा जान सकते हैं।

दिव्यांग और बुजर्गों को नहीं चलना पड़े पैदल
महाकाल मंदिर प्रशासक संदीप सोनी के अनुसार, महाकाल लोक प्रोजक्ट 12 अक्टूबर को भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा। यहां हर जगह संकेतक लगाए जा रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की कोई असुविधा न हो। दिव्यांग और बुजुर्गों को किसी तरह की कोई तकलीफ न हो, इसके लिए ई-रिक्शा का संचालन भी किया जाएगा। ई-रिक्शा वाहन की सुविधा पार्किंग क्षेत्र जो त्रिवेत्री संग्रहालय के नजदीक बनाया गया है से उपलब्ध रहेगी।

कर्मचारियों को दी जाएगी खास ट्रेनिंग
महाकाल लोक प्रोजेक्ट शुरू होते ही मंदिर आने वाले भक्तों की संख्या में बढोत्तरी होगी। इसी अनुमान के चलते मंदिर समिति यहां काम करने वाले कर्मचारियों को खास ट्रेनिंग देने की योजना बना रही है। आम तौर पर रोज महाकाल मंदिर में 20 से 25 हजार भक्त आते हैं और लेकिन सावन, नागपंचमी व अन्य मौकों पर इनकी संख्या लाखों में पहुंच जाती है। त्योहार पर बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ कर्मचारी कैसे व्यवहार कर उनकी मदद करें, इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी।



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