चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंगपंचमी (Rangpanchami 2022) का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 22 मार्च, मंगलवार को है। ये पर्व मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से मनाया जाता है। इस मौके पर कई विशेष आयोजन अलग-अलग स्थानों पर किए जाते हैं।

उज्जैन. इंदौर (Indore) में गैर (जुलूस) निकाला जाता है। उज्जैन (Ujjain) में महाकाल मंदिर की गैर निकाली जाती है, जिसमें प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा ही एक आयोजन अशोकनगर (Ashoknagar) जिले के करीला गांव (Karila Village) में भी किया जाता है। यहां स्थित रामजानकी मंदिर में रंगपंचमी के मौके पर मेले का आयोजन किया जाता है। इसे करीला मेले (karela Mela) के नाम से जाना जाता है। ये मेला 3 दिनों तक चलता है। बड़ी संख्या में लोग इस मेले में शिरकत करने और माता जानकी के दर्शन करने आते हैं। और भी कई परंपराएं इस मेले को खास बनाती हैं। जानिए रंगपंचमी के इस मेले से जुड़ी खास बातें…

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मंदिर में सिर्फ माता जानकी की होती है पूजा
आमतौर पर मंदिरों में माता जानकी के साथ भगवान श्रीराम की प्रतिमा भी होती है, लेकिन यहां ऐसा नहीं है। इस मंदिर में सिर्फ माता सीता की ही मूर्ति स्थापित है। इसी के दर्शन करने लोग यहां आते हैं। साथ ही यहां लव-कुश और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। इस मंदिर से जुड़ी और एक खास बात ये है कि जिसकी मन्नत पूरी हो जाती है, वो यहां बधाई और राई नृत्य करवाता है। मान्यता है कि माता जानकी ने यहीं लव-कुश को जन्म दिया था। उनके जन्मोत्सव के समय स्वर्ग से अप्सराओं ने आकर नृत्य किया था। तभी से यह प्रथा आज तक निभाई जा रही है।

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3 दिन के मेले में आते हैं लाखों लोग
हर साल करीला में तीन दिवसीय मेला लगता है। इस मेले में लाखों लोग अपनी मुरादें लेकर आते हैं। मान्यता है कि नि:संतान दंपत्ति अगर इस मंदिर में संतान के लिए प्रार्थना करें तो उसकी इच्छा जल्दी ही पूरी हो जाती है। मनोकामना पूरी होने पर मंदिर में राई नृत्य करवाया जाता है या फिर जो महिलाएं नृत्य करती हैं उन्हें न्यौछावर देनी पड़ती है।

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कैसे पहुंचें?
अशोकनगर गुना से नजदीक है। इन दोनों शहरों में रेलवे स्टेशन भी है, जो सभी रेल लाइनों से जुडा है। सड़क मार्ग द्वारा भी यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां से सबसे नजदीक हवाई अड्डा ग्वालियर में है।


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