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यज्ञ की अग्नि से हुआ था इस पराक्रमी योद्धा का जन्म, श्रीकृष्ण ने बनाया था पांडवों का सेनापति

महाभारत के युद्ध में कौरवों की ओर से कई सेनापति बनाए गए, इनमें भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य और कर्ण प्रमुख थे, लेकिन पांडवों की ओर से सिर्फ एक ही सेनापति युद्ध के अंत तक रहा था। ये थे पांचाल देश के युवराज धृष्टद्युम्न।

This mighty warrior was born with the fire of yagya, Shri Krishna made him the commander of the Pandavas KPI
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Ujjain, First Published Mar 21, 2021, 3:16 PM IST
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उज्जैन. धृष्टद्युम्न द्रौपदी के भाई थे। इनके जन्म की कथा भी बड़ी विचित्र है। इन्होंने ने ही गुरु द्रोणाचार्य का वध भी किया था। आगे जानिए धृष्टद्युम्न से जुड़ी खास बातें…

यज्ञ से हुआ था धृष्टद्युम्न का वध
गुरु द्रोणाचार्य ने कौरवों और पांडवों को शिक्षा देने के बाद गुरु दक्षिणा में पांचाल देश के राजा द्रुपद को बंदी बनाने के लिए कहा। कौरव इस प्रयास में असफल हुए, लेकिन अर्जुन के पराक्रम से पांडवों ने राजा द्रुपद को बंदी लिया और गुरु द्रोणाचार्य के सामने ले आए। द्रोणाचार्य ने राजा द्रुपद का आधा राज्य लेकर उन्हें छोड़ दिया। अपने अपमान का बदला लेने के लिए द्रुपद ने एक यज्ञ किया, जिससे एक दिव्य कुमार उत्पन्न हुआ। उसके सिर पर मुकुट और शरीर पर कवच था। तभी आकाशवाणी हुई कि यह कुमार द्रोणाचार्य को मारने के लिए ही उत्पन्न हुआ है।

श्रीकृष्ण के कहने पर बनाया सेनापति
जब कौरवों और पांडवों में युद्ध होना निश्चित हो गया, तब कौरवों की ओर से गंगापुत्र भीष्म को सेनापति बनाया गया। लेकिन पांडवों की ओर से उनके समकक्ष कोई योद्धा नहीं था, तब श्रीकृष्ण ने धृष्टद्युम्न को पांडवों की सेना का सेनापति नियुक्त किया। युद्ध के अंत तक धृष्यद्युम्न पांडवों के सेनापति रहे। युद्ध के दौरान जब अपने पुत्र की मृत्यु को सच मानकर गुरु द्रोण ने अपने अस्त्र नीचे रख दिए तब धृष्टद्युम्न ने तलवार से गुरु द्रोण का वध कर दिया।

ऐसे हुई धृष्टद्युम्न की मृत्यु
युद्ध समाप्त होने पर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने अपने पिता के वध का बदला लेने के लिये रात के समय पांडवों के शिविर में प्रवेश किया। उस समय पांडव वहां नहीं थे। रात में जब पांडव पक्ष के सभी योद्धा सो रहे थे, उस समय अश्वत्थामा ने धृष्टद्युम्न को नींद से जगाया और कहा- मेरे पिता को निःशस्त्र अवस्था में तुमने हत्या की थी। इसलिये तुम्हारी भी ऐसे ही हत्या होगी। अश्वत्थामा ने ये बोल कर धृष्टद्युम्न को पीटना शुरू कर दिया। उसके बाद उनका सिर धड़ से अलग कर दिया।

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