वैशाख हिंदू पंचांग का दूसरा महीना है। इस बार वैशाख मास का प्रारंभ 28 अप्रैल से होगा, जो 26 मई तक रहेगा।

उज्जैन. ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बावाला के अनुसार, वैशाख में विष्णु भगवान की पूजा और पीपल को सींचने का महत्व है। भगवान विष्णु को सुबह, दोपहर और शाम को राम व श्याम तुलसी चढ़ाने से पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। इस महीने में तीर्थ स्नान के बाद पीपल को जल, कच्चा दूध व जल चढ़ाकर दीपक लगाने की शास्त्रोक्त परंपरा है।

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शिवलिंग पर बांधी जाती है गलंतिका
वैशाख मास में शिवलिंग के ऊपर गलंतिका (एक मटकी जिसमें से बूंद-बूंद पानी टपकता रहता है) बांधी जाती है। इसके पीछे मान्यता है कि भगवान शिव के गले में जो विष है, उसके कारण उनके शरीर की गर्मी बहुत बढ़ जाती है। इसी को शांत करने के लिए शिवलिंग पर गलंतिका बांधी जाती है।

वैशाख मास का महत्व
स्कंद पुराण के अनुसार, महीरथ नामक राजा ने केवल वैशाख स्नान से ही वैकुण्ठधाम प्राप्त किया था। इसमें व्रती (व्रत रखने वाला) को प्रतिदिन सुबह सूर्योदय से पूर्व किसी तीर्थस्थान, सरोवर, नदी या कुएं पर जाकर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य देते समय नीचे लिखा मंत्र बोलना चाहिए-

वैशाखे मेषगे भानौ प्रात: स्नानपरायण:।
अर्ध्य तेहं प्रदास्यामि गृहाण मधुसूदन।।

वैशाख मास में रखें इन बातों का ध्यान
1.
वैशाख व्रत महात्म्य की कथा सुननी चाहिए तथा ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए।
2. व्रती (व्रत करने वाला) को एक समय भोजन करना चाहिए।
3. वैशाख मास में जलदान का विशेष महत्व है। इस महीने में प्याऊ की स्थापना करवानी चाहिए।
4. पंखा, खरबूजा एवं अन्य फल, अनाज आदि का दान करना चाहिए।
5. स्कंद पुराण के अनुसार, इस महीने में तेल लगाना, दिन में सोना, कांसे के बर्तन में भोजन करना, दो बार भोजन करना, रात में खाना आदि वर्जित माना गया है।