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Vishwakarma Puja 2022: कौन हैं भगवान विश्वकर्मा, क्या इन्होंने ही बनाई थी सोने की लंका?

Vishwakarma Puja 2022: इस बार 17 सितंबर, शनिवार को विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जाएगा। इस पर्व में भगवान विश्वकर्मा के साथ-साथ मशीनों और औजारों की पूजा भी की जाती है। विश्वकर्मा को देवशिल्पी भी कहा जाता है।
 

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First Published Sep 17, 2022, 5:45 AM IST

उज्जैन. भगवान विश्वकर्मा का वर्णन अनेक धर्म ग्रंथों में किया गया है। इन्हें देवशिल्पी कहा जाता है यानी देवताओं का इंजीनियर। इस बार 17 सितंबर, शनिवार को विश्वकर्मा पूजा (Vishwakarma Puja 2022) का पर्व मनाया जाएगा। धर्म ग्रंथों के अनुसार, बह्मदेव ने विश्वकर्मा को सष्टि का शिल्पीकार नियुक्त किया था। उन्होंने स्वर्ग लोक, इंद्रपुरी, द्वारिका नगरी, सोने की लंका, सुदामापुरी जैसे कई नगर और स्थानों का निर्माण किया। आगे जानिए देवशिल्पी विश्वकर्मा से जुड़ी खास बातें…

विश्वकर्मा ने ही बनाई थी द्वारिका नगरी
श्रीमद्भागवत के अनुसार, द्वारिका नगरी का निर्माण विश्वकर्मा ने ही किया था। उस नगरी में विश्वकर्मा का विज्ञान (वास्तु शास्त्र व शिल्पकला) की निपुणता प्रकट होती थी। द्वारिका नगरी की लंबाई-चौड़ाई 48 कोस थी। उसमें वास्तु शास्त्र के अनुसार बड़ी-बड़ी सड़कों, चौराहों और गलियों का निर्माण किया गया था।

सोने की लंका भी इन्होंने ही बनाई
धर्म ग्रंथों के अनुसार, सोने की लंका का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था। माल्यवान, सुमाली और माली नाम के तीन पराक्रमी राक्षस थे। उन्होंने विश्वकर्मा से कहा कि आज हमारे लिए एक विशाल निवास स्थान का निर्माण कीजिए। तब विश्वकर्मा ने उन्हें बताया कि दक्षिण समुद्र तट पर मैंने इंद्र की आज्ञा से सोने से निर्मित लंका नगरी का निर्माण किया है। तुम वहां जाकर रहो। 

भगवान शिव का रथ भी बनाया
महाभारत के अनुसार, तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली के नगरों का विध्वंस करने के लिए भगवान महादेव जिस रथ पर सवार हुए थे, उस रथ का निर्माण विश्वकर्मा ने ही किया था। वह रथ सोने का था। उसके दाहिने चक्र में सूर्य और बाएं चक्र में चंद्रमा विराजमान थे। दाहिने चक्र में बारह आरे तथा बाएं चक्र में 16 आरे लगे थे।

विश्वकर्मा के पुत्र थे नल-नील
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम के आदेश पर समुद्र पर पत्थरों से पुल का निर्माण किया गया था। रामसेतु का निर्माण मूल रूप से नल नाम के वानर ने किया था। नल शिल्पकला (इंजीनियरिंग) जानता था क्योंकि वह देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा का पुत्र था। अपनी इसी कला से उसने समुद्र पर सेतु का निर्माण किया था।


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