19 नवंबर तक रहेगा कार्तिक मास, इस महीने में दान करनी चाहिए ये ये खास चीजें, इस विधि से करें नदी स्नान

Published : Oct 24, 2021, 05:45 AM IST
19 नवंबर तक रहेगा कार्तिक मास, इस महीने में दान करनी चाहिए ये ये खास चीजें, इस विधि से करें नदी स्नान

सार

धर्म ग्रंथों में हर महीने का अलग-अलग महत्व बताया गया है। इसी के अंतर्गत कार्तिक मास को श्रेष्ठ मास माना जाता है। ये हिंदू पंचाग का 8वां महीना है। इस बार 21 अक्टूबर से कार्तिक मास की शुरुआत हो चुकी है, जो 19 नंवबर तक रहेगा।

उज्जैन. पुराणों में बताया गया है कि कार्तिक (Kartik month 2021) के समान कोई महीना नहीं है, न सतयुग के समान कोई युग और न वेद के समान कोई शास्त्र और गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं है। इस मास को रोगनाशक मास होने के साथ-साथ सुबुद्धि, लक्ष्मी और मुक्ति प्रदान कराने वाला मास भी कहा जाता है। इस महीने कृष्णपक्ष की तेरहवीं और चौदहवीं तिथि को लेकर पंचांग भेद है। लेकिन, किसी तिथि का क्षय नहीं होने के कारण ये महीना 30 दिनों का रहेगा।  श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि ये महीना मुझे बहुत प्रिय है। 

श्लोक
न कार्तिकसमो मासो न कृतेन समं युगम्।
न वेदसदृशं शास्त्रं न तीर्थं गंगा समम्।।

इन चीजों के दान का महत्व
इस महीने तुलसी, अन्न, गाय, कंबल और आंवले का पौधा दान करने का विशेष महत्व होता है। जो देवालय में, नदी के किनारे, सड़क पर या जहां सोते हैं वहां पर दीपदान करता है उसे सर्वतोमुखी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। यानी हर तरफ से लक्ष्मी की कृपा मिलती है। जो मंदिर में दीप जलाता है उसे विष्णु लोक में जगह मिलती है। जो दुर्गम जगह दीप दान करता है वह कभी नरक में नहीं जाता, ऐसी मान्यता है।इस महीने में केले के फल का तथा कंबल का दान अत्यंत श्रेष्ठ है। सुबह जल्दी भगवान विष्णु की पूजा और रात्रि में आकाश दीप का दान करना चाहिए।

इस विधि से करें कार्तिक मास में नदी स्नान...
स्कंदपुराण के अनुसार, कार्तिक महीने में किया गया स्नान व्रत भगवान विष्णु की पूजा के समान कहा गया है। कार्तिक मास में स्नान किस प्रकार किया जाए, इसका वर्णन शास्त्रों में इस प्रकार लिखा है-
तिलामलकचूर्णेन गृही स्नानं समाचरेत्।
विधवास्त्रीयतीनां तु तुलसीमूलमृत्सया।।
सप्तमी दर्शनवमी द्वितीया दशमीषु च।
त्रयोदश्यां न च स्नायाद्धात्रीफलतिलैं सह।।

अर्थात- कार्तिक व्रती (व्रत रखने वाला) को सबसे पहले गंगा, विष्णु, शिव तथा सूर्य का स्मरण कर नदी, तालाब या पोखर के जल में प्रवेश करना चाहिए। उसके बाद नाभिपर्यन्त (आधा शरीर पानी में डूबा हो) जल में खड़े होकर स्नान करना चाहिए।
गृहस्थ व्यक्ति को काला तिल तथा आंवले का चूर्ण लगाकर स्नान करना चाहिए परंतु विधवा तथा संन्यासियों को तुलसी के पौधे की जड़ में लगी मृत्तिका (मिट्टी) को लगाकर स्नान करना चाहिए। सप्तमी, अमावस्या, नवमी, द्वितीया, दशमी व त्रयोदशी को तिल एवं आंवले का प्रयोग वर्जित है।
इसके बाद व्रती को जल से निकलकर शुद्ध वस्त्र धारणकर विधि-विधानपूर्वक भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए। यह ध्यान रहे कि कार्तिक मास में स्नान व व्रत करने वाले को केवल नरक चतुर्दशी (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी) को ही तेल लगाना चाहिए। शेष दिनों में तेल लगाना वर्जित है।

कार्तिक मास के बारे में ये भी पढ़ें

30 दिनों का रहेगा कार्तिक मास, 5 गुरुवार होना शुभ, इस महीने 12 दिन रहेंगे महिलाओं के व्रत-उपवास

शुरू हो चुका है कार्तिक मास, शुभ फल पाने के लिए इस महीने में क्या करें और क्या करने से बचें

कार्तिक मास में किया जाता है तारा स्नान और तारा भोजन, जानिए क्या है ये परंपरा?

कार्तिक मास 21 अक्टूबर से 19 नवंबर तक, इस महीने में मनाए जाएंगे करवा चौथ और दीपावली जैसे बड़े त्योहार

PREV
Spirituality News in Hindi (आध्यात्मिक खबर): Get latest spirituality news about festivals, horoscope, religion, wellness, metaphysical, parapsychology and yoga in India at Asianet News Hindi

Recommended Stories

Chandra Grahan 2026: क्या होली पर होगा चंद्र ग्रहण? जानें सच या झूठ
Makar Sankranti 2026 Muhurat: दोपहर बाद शुरू होगा मकर संक्रांति का मुहूर्त, यहां नोट करें टाइम