
बिजनेस डेस्क। कोरोना महामारी और लॉकडाउन से जहां लोगों की आमदनी कम हुई है, वहीं ऑयल कंपनियां लगातार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा करती जा रही हैं। इससे आम आदमी पर दोहरी मार पड़ रही है। डीजल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ने पर बाजार में हर चीज की कीमत पर असर पड़ता है। तेल कंपनियों ने कुछ समय तक तो दाम नहीं बढ़ाए, लेकिन फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी शुरू कर दी गई है। पिछले 9 दिनों के भीतर धीर-धीरे पेट्रोल को 5 रुपए प्रति लीटर महंगा कर दिया गया है, वहीं डीजल के भाव में 5.23 रुपए की बढ़ोत्तरी हुई है। ऐसा तब हो रहा है, जब तेल कंपनियों को लंबे समय तक क्रूड सस्ते दर पर उपलब्ध था।
ब्रेंट क्रूड 20 डॉलर के नीचे चला गया था
गौरतलब है कि कोरोना संकट के दौरान डिमांड कम होने से ब्रेंट क्रूड का भाव 20 डॉलर के नीचे चला गया था। कीमत कम होने से कंपनियों ने तेल का स्टोरेज तो काफी कर लिया, लेकिन ग्राहकों को राहत देने की जगह पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ा कर मुनाफाखोरी करने लगीं। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का करीब 82 फीसदी क्रूड इम्पोर्ट करता है। सरकार के मुनाफे में इसका बड़ा योगदान है।
85 रुपए प्रति लीटर पार हुआ पेट्रोल
महाराष्ट्र के परभनी में सोमवार को पेट्रोल की कीमत 85.17 रुपए प्रति लीटर है, वहीं डीजल का भाव 74.04 रुपए हो गया है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह तेजी लगातार 9वें दिन भी देखने को मिली। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल का भाव 76.26 पैसे प्रति लीटर हो गया, जो रविवार को 75.78 रुपए लीटर था। डीजल की कीमत 74.62 रुपए प्रति लीटर हो गई, जबकि रविवार को यह 74.03 रुपए प्रति लीटर थी। पब्लिक सेक्टर की कंपनी इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर दिए गए रेट के मुताबिक, सोमवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 48 पैसे प्रति लीटर बढ़ी है। डीजल की कीमत 59 पैसे प्रति लीटर बढ़ी। 9 दिनों में पेट्रोल 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल 5.23 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है।
क्यों बढ़ रही है कीमत
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्च में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 3 रुपए प्रति लीटर का इजाफा कर दिया था। लेकिन तेल कंपनियों ने दाम नहीं बढ़ाया। लॉकडाउन में जब छूट मिली तो अचानक पेट्रोल और डीजल की मांग बढ़ी। इधर, रुपए की कीमत में भी गिरावट आई है। लॉकडाउन में तेल कंपनियों को जे नुकसान उठाना पड़ा था, उसकी भरपाई अब वे कीमत बढ़ा कर करना चाहती हैं।
क्या है क्रूड की कीमत
अब क्रूड के दामों में भी तेजी आई है। 21 अप्रैल को जो क्रूड 17.51 डॉलर प्रति बैरल मिल रहा था, अब उसकी कीमत 38 डॉलर के करीब हो गई है। इसका मतलब है कि पिछले 2 महीने में क्रूड की कीमतों में 100 फीसदी की तेजी आई है। रुपए की कीमत में गिरावट आने से ऑयल कंपनियों को तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करना होगा।
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