CPI का दावा- विदेशी शिक्षण संस्थाओं को भारत में ब्रांच खोलने की अनुमति देना बेहद घातक

Published : Jan 08, 2023, 06:10 AM IST
CPI का दावा- विदेशी शिक्षण संस्थाओं को भारत में ब्रांच खोलने की अनुमति देना बेहद घातक

सार

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी यूजीसी ने हाल ही में ऐसे नियमों का खुलासा किया है, जिसके अंतर्गत विदेशी कॉलेजों को अपनी प्रवेश नीतियों, ट्यूशन दरों और पैसे घर भेजने की पॉवर को कंट्रोल करने की अनुमति देगा।  

एजुकेशन डेस्क।  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने दावा किया है विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन की ओर से विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में ब्रांच स्थापित करने की अनुमति देने का निर्णय देश की उच्च शिक्षा को नुकसान पहुंचाएगा। कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, इस मामले पर सुझाव प्रस्तुत करने के लिए दिया गया समय बेहद कम है। 

पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि यह पॉलिसी भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाएगी। यह उसे कमजोर करेगी और नष्ट कर देगी। इससे शिक्षा का व्यवसायिकरण भी होगा। इस फैसले से देश में उच्च शिक्षा महंगी होगी और दलितों, अल्पसंख्यकों तथा गरीबों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। लेफ्ट पार्टी की ओर से कहा गया है कि यह फैसला शिक्षा मंत्री की ओर से संसद में दिए गए एक बयान के बैकग्राउंड में सरकार के अमीर-समर्थक दृष्टिकोण का प्रतिबिंब है। इसमें कहा गया था कि भारतीयों को इस विचार पर निर्भर रहना बंद कर देना चाहिए कि विश्वविद्यालयों को सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाना चाहिए। 

कम्युनिस्ट पार्टी ने केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप 
पार्टी की ओर से कहा गया है कि जब अधिक धन की जरूरत होती है, तो यह कहा जाता था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अध्यक्षता वाली सरकार अपने बजट का 3 प्रतिशत से भी कम शिक्षा के लिए आवंटित करती है। कम्युनिस्ट पार्टी के अनुसार, यह फैसला सामाजिक निष्पक्षता के सिद्धांत और आरक्षण नीति दोनों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेगा। पार्टी की ओर से बयान में कहा गया है कि राज्यों पर ऐसी नीति थोपना संघीय विरोधी होगा और उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा। 

सीपीआई का दावा- छात्र और देश के भविष्य खतरे में आएगा 
बयान में कहा गया है कि पार्टी मांग करती है कि ऐसे विश्वविद्यालयों के लिए नियामक ढांचे को संसद के सामने रखा जाना चाहिए और जल्दबाजी में और एकतरफा निर्णय लेने से पहले संसद में चर्चा की जानी चाहिए, जो छात्रों और देश के भविष्य को खतरे में डाल सकता है। सीपीआई ने सभी छात्रों और शिक्षक संगठनों से इस फैसले का विरोध करने का आह्वान किया है। बता दें कि हाल ही में यूजीसी ने ऐसे नियमों का खुलासा किया है, जिसके अंतर्गत विदेशी कॉलेजों को अपनी प्रवेश नीतियों, ट्यूशन दरों और पैसे घर भेजने की पॉवर को कंट्रोल करने की अनुमति देगा।  

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