
एजुकेशन डेस्क। देश और समाज को आगे ले जाने के शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। यह न केवल लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती है बल्कि देश की संस्कृति को संजोने और उसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इसी समाज में रहने वाले तमाम ऐसे लोग हैं जो शिक्षा के प्रचार के लिए लगातार साक्षरता कार्यक्रम के साथ ही कल्चरल इवेंट्स को भी प्रमोट कर रहे हैं।
इन्हीं में से एक हैं जम्मू कश्मीर के पुलवामा डिस्ट्रिक्ट के छोटे से कस्बे त्राल के बुचु गांव निवासी सतीश विमल जो मल्टीलिंगवल (बहुभाषी) राइटर, कवि होने के साथ ऑल इंडिया रेडियो श्रीनगर में कार्यरत हैं। शिक्षा के प्रचार और कल्चर को बढ़ावा देने के लिए सतीश विमल कई सारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रोग्राम्स भी करते आ रहे हैं।
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सतीश विमल का स्कूल डेज से कविताओं से नाता
अपनी गांव की मिट्टी से उनका गहरा नाता और मातृभाषा में पेश किए जाने वाले कार्यकम और उनकी बातें रेडियो पर उनके सुनने वालों को कश्मीरी कल्चर और वहां के इतिहास से सीधा जोड़ता है। उनकी कविताओं और साहित्य ने उन्हें कश्मीर की विरासत सरीखा बना दिया है। सतीश विमल की जर्नी एक कविताकार के रूप में उनके स्कूल के दिनों से ही शुरू हो गई थी जब मोहल्ला थियेटर और प्रोग्राम्स के लिए कविताओं औऱ स्क्रिप्ट लिखा करते थे। शर्मिले नेचर के बाद भी उन्होंने कई नाटकों में गीत भी लिखे हैं।
कश्मीरी पोएट सतीश विमल को मिला स्कूल टीचर का गाइडेंस
सतीश बताते हैं कि स्कूल टीचर मोहम्मद शाबबान मीर की उनकी जीवन में काफी अहम भूमिका रही है. एक मेंटर, गाइ़ड और सहयोगी के तौर पर उन्होंने कविता लिखने के दौरान काफी कुछ सिखाया। हायर एजुकेशन कंप्लीट करने के बाद उन्होंने दूरदर्शन केंद्र श्रीनगर ज्वाइन कर लिया।
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किताबों में दिखा सतीश विमल का कश्मीर प्रेम
satish vimal wrote poems on kashmir culture and history: पढ़ाई को लेकर उनका लगाव ही था कि उन्होंने इंग्लिश लिट्रेचर में हायर एजुकेशन की पढ़ाई की। इंग्लिश पोएट्स औऱ विश्व साहित्य के बारे में ज्यादा से ज्यादा पढ़ा। इन अंग्रेजी कवियों की किताबों से इंसपायर होकर इन्होंने हिन्दी, अंग्रेजी कश्मीरी और उर्दू भाषा में भी किताबें लिखीं। उनकी किताबें ‘विनाश का विजेता’, ‘ठूंठ की छाया’, ‘सिया वार’ में सतीश विमल का कश्मीरी भाषा, कल्चर और इतिहास के प्रति लगाव साफ झलकता है। कश्मीरी कल्चर और वहां की सांस्कृतिक धरोहर को बचाए रखने के लिए औऱ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सतीश रेडियो और कविताओं के माध्यम से जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।
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