
करियर डेस्क. भारत के तीन राज्य मणिपुर (Manipur), त्रिपुरा (Tripura) और मेघालय (Meghalaya) का आज (21 जनवरी) को स्थापना दिवस (Statehood Day) है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi), राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस तीनों राज्यों के स्थापना दिवस पर बधाई दी है। लेकिन क्या आप जानते हैं 1947 में आजादी के समय ये पूर्ण राज्य नहीं थे। इनके पूर्ण राज्य बनने की कहानी अलग है। 21 जनवरी 1972 को इन तीनों राज्यों को देश के पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। आइए जानते हैं इन राज्यों के बारे में।
त्रिपुरा
त्रिपुरा राज्य का एक लंबा इतिहास रहा है। त्विपरा साम्राज्य 14वीं और 15वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व के दौरान अपने चरम पर बंगाल के पूरे पूर्वी क्षेत्र में, उत्तर और पश्चिम में ब्रह्मपुत्र नदी तक, दक्षिण में बंगाल की खाड़ी तक और पूर्व में बर्मा तक फैला हुआ था। त्रिपुरा की रियासत के अंतिम शासक किरीत बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर देबबर्मा थे, जिन्होंने 1947 से 1949 तक अगरतला पर शासन किया था, जिसके बाद 9 सितंबर 1949 को रियासत को भारत गणराज्य में विलय कर दिया गया था और प्रशासन 15 अक्टूबर 1949 को हस्तांतरित कर दिया गया था। 1 जुलाई 1963 को त्रिपुरा एक केंद्र शासित प्रदेश बना और 21 जनवरी 1972 को इसे एक पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।
मेघालय
मेघालय का गठन पुराने असम राज्य के दो जिलों खासी पहाड़ों और जयंतिया पहाड़ों से मिलाकर किया गया था। इन्हें मिला कर ही मेघालय का गठन 21 जनवरी 1972 को हुआ था। इसका क्षेत्रफल 22430 वर्ग किलोमीटर है। इसकी सीमा ऊपर में असम और नीचे बांग्लादेश से मिलती है। मेघालय आजादी से काफी समय पहले से ही असम का हिस्सा था। 1905 में बंगाल विभाजन के बाद मेघालय पूर्वी बंगाल और असम का हिस्सा हो गया 1912 में यह विभाजन खत्म हो गया और मेघालय असम में आ गया था। आजादी के बाद मेघालय असम का हिस्सा रहा। 1960 से इसके अलग राज्य की मांग उठी। 1969 में यह अलग राज्य तो बना, लेकिन अपनी खुद की विधान सभा वाला संपूर्ण राज्य 1972 में ही बन सका।
मणिपुर
15 अगस्त 1947 को मणिपुर संपूर्ण रूप से भारत का हिस्सा नहीं था। ब्रिटिश राज के दौरान मणिपुर एक रियासत थी। आज़ादी के समय मणिपुर के महाराजा बोधचंद्र सिंह ने विलय पत्र पर 1949 तक हस्ताक्षर नहीं किए थे। मणिपुर के भारत में विलय को लेकर विधानसभा में बड़ा मतभेद था। इस बीच हालात ऐसे हुए कि भारत सरकार को सितंबर 1949 में मणिपुर की विधानसभा से परामर्श लिए बगैर महाराजा बोधचंद्र से विलय पत्र पर हस्ताक्षर करवाना पड़ा। यह विलय 15 अक्टूबर 1949 से लागू कर दिया गया। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने पर यह एक मुख्य आयुक्त के अधीन भारतीय संघ में भाग ‘सी’ के राज्य के रूप में शामिल हुआ। बाद में इसके स्थान पर एक प्रादेशिक परिषद गठित की गई जिसमें 30 चयनित तथा दो मनोनीत सदस्य थे। इसके बाद 1962 में केंद्रशासित प्रदेश अधिनियम के अंतर्गत 30 चयनित तथा तीन मनोनीत सदस्यों की एक विधानसभा स्थापित की गई। 19 दिसंबर, 1969 से प्रशासक का दर्जा मुख्य आयुक्त से बढ़ाकर उपराज्यपाल कर दिया गया। 21 जनवरी, 1972 को मणिपुर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और 60 निर्वाचित सदस्यों वाली विधानसभा गठित की गई।
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