Published : Jan 28, 2020, 11:20 AM ISTUpdated : Jan 28, 2020, 11:25 AM IST
नई दिल्ली. निर्भया के दोषियों के 1 फरवरी की सुबह फांसी दी जानी है। लेकिन इस बीच कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद फांसी की तारीख टल जाए। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि अभी तीन दोषियों के पास दया याचिका का विकल्प बचा हुआ है। सिर्फ मुकेश की ही दया याचिका खारिज हुई है। ऐसे में बताते हैं कि किसी स्थिति में दोषियों को दया याचिका का विकल्प बचा रहेगा और दोषियों को फांसी मिलने की कितनी संभावना है।
तीन दोषियों ने अगर 31 जनवरी की दोपहर 12 बजे तक दया याचिका दे दी तो इनकी फांसी रुक सकती है। अगर 12 बजे तक इन्होंने दया याचिका नहीं दी तो अगले दिन 1 फरवरी को सुबह 6 बजे इन्हें फांसी पर लटका दिया जाएगा।
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28-29 जनवरी की रात 12 बजे से 1 फरवरी की सुबह 6 बजे तक, दोषियों के पास सिर्फ 78 घंटे का वक्त बचा है। हालांकि दया याचिका लगाने के लिए सिर्फ 60 घंटे का वक्त है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि दोषी अपनी दया याचिका कब लगाते हैं।
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अगर राष्ट्रपति ने दया याचिका खारिज कर दिया, तब भी दोषियों को 14 दिन का वक्त दिया जाएगा। ऐसे में अगर एक भी दोषी ने दया याचिका लगा दी तो फांसी की तारीख फिर से टालनी पड़ेगी। इससे पहले 22 जनवरी को फांसी की तारीख तय की गई थी, जिसे याचिका के बाद ही टाल कर 1 फरवरी किया गया था।
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दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया।
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पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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