
हेल्थ डेस्क. रेपन्जेल सिन्ड्रोम (Rapunzel Syndrome) काफी रेयर बीमारी है। जो इंसान इस बीमारी से पीड़ित होता है उसे कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम होने लगती है। हाल ही में मुंबई में इस बीमारी से पीड़ित एक लड़की की कहानी सामने आई। डॉक्टर ने 13 साल की लड़की के पेट से 1.2 किलो वजन का बाल का गुच्छा निकाला। पढ़कर दंग रह गए ना, इतने बाल लड़की के पेट में कैसे पहुंचा। दरअसल, इस बीमारी में पीड़ित अपने ही बालों को नोच कर खाने लगता है।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 13 साल की लड़की के पेट में जब दर्द हुआ तो उसके परिवार वाले मुंबई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराए। लड़की को पेट दर्द, उल्टी और अपच की शिकायत थी। जिसके बाद उसका सोनोग्राफी किया गया। जिसमें लड़की के आंत में बाल के गुच्छ मिले। सर्जरी के जरिए उसे निकाला गया। जिसका वजन करीब एक किलो से ज्यादा था। डॉक्टर ने बताया कि लड़की खुद से अपने बालों को नोचकर खाती थी। वो रेपन्जेल सिन्ड्रोम से पीड़ित थी।
रेपन्जेल सिन्ड्रोम नाम क्यों पड़ा
दरअसल, रेपन्जेल, ब्रदर्स ग्रिम की एक कहानी का कैरेक्टर है। इस कैरेक्टर के बाल काफी लंबे होते हैं और जादूगरनी जब उसे एक मीनार में कैद कर देती है तब वो अपने बालों को खिड़की से नीचे लटका देती है। ताकि वो अपने राजकुमार को उपर बुला सके। रेपन्जेल के बालों की वजह से ही इस बीमारी का नाम रखा गया है। पहली बार 1968 में इसके बारे में पता चला था, तब इसका नामकरण किया गया था।
इस बीमारी में मरीज के पेट में बालों का गुच्छा मिलता है। क्योंकि वो खुद ही अपने सिर के बाल को नोचकर खाने लगता है। अपने नाखून को चबाने लगते हैं। पुरुषों की तुलना में यह बीमारी महिलाओं में ज्यादा होती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 10 में से 8 मामलों में यह बच्चों, किशोरियों और 30 साल के कम उम्र की लड़कियों में देखा गया। इतना ही नहीं ज्यादातर लोगों जो मानसिक विकार के इतिहास से जुड़े हैं उन्हें यह बीमारी हुई।
रेपन्जेल सिन्ड्रोम के लक्षण-
बालों का टूटना
पेट में दर्द होना
नाखून चबाना
सूजन
वजन घटना
भोजन के बाद उल्टी होना
पसली के नीचे दर्द या बेचैनी
जी मिचलाना
वजन बढ़ने या घटने का डर होना
हालांकि इसके लक्षणों को शुरुआत में पहचानना मुश्किल होता है। जिसकी वजह से यह बीमारी बढ़ जाती है। अगर शुरुआत में ही इसका पता चल पाए तो इलाज मुमकीन है। डॉक्टर बताते हैं इस बीमारी में खुद के बाल को नोचने की तीव्र इच्छा होती है। मरीज खुद के बाल तोड़कर खाने लगता है। चूकि बाल पेट में पचता नहीं इसलिए वो आंत में जाकर जमा होने लगता है और गुच्छा बन जाता है। जो कई समस्याओं को जन्म देता है।
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