देखते-देखते दिल्ली-गुरुग्राम पहुंचा कोरोना का नया वैरिएंट, AIIMS ने बताया JN.1 का सबसे खास लक्षण

Published : Dec 28, 2023, 04:28 PM IST
corona

सार

Coronavirus JN.1 Variant update: हर साल की तरह इस बार भी कोरोना का नया सब वैरिएंट तेजी से फैल रहा है। दिल्ली और गुरुग्राम में भी पहला केस आ गया है। इसे देखते हुए एम्स ने जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं।

हेल्थ डेस्क.पिछले कुछ दिनों से कोरोना भारत में तेजी से फैलने लगा है। गुरुवार को कोरोना के 700 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। वहीं 6 लोगों की मौत है। वहीं कोरोना का नया वैरिएंट JN.1 के केस करीब हर राज्य में मिलने शुरू हो गए हैं। दिल्ली में पहला केस मिलने का मामला सामने आया है। वहीं गुरुग्राम, अजमेर समेत कई शहरों में JN.1 ने लोगों को अपने चपेट में लेना शुरू कर दिया है। वहीं, एम्स के बड़े डॉक्टरों ने तुरंत मीटिंग करके इस नए वैरिएंट के बारे में खास सूचना दी है।

जेएन. 1 वैरिएंट दूसरे वैरिएंट के मुकाबले तेजी से फैलता है। सांस से जुड़ी बीमारी से पीड़ित लोगों को जल्द ही निशाना बनाता है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो एम्स ने सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के मरीजों की टेस्टिंग बढ़ा दी है। इसके साथ ही एक नया प्राइवेट वार्ड तैयार किया गया है जहां पर गंभीर संक्रमण के मरीजों को रखा जा सकें।

JN.1 वेरिएंट के खास लक्षण

इसके साथ ही ऑफिशियल गाइडलाइन में JN.1 वेरिएंट के खास लक्षण के बारे में भी बताया गया है। इस खास लक्षण में कहा गया है कि अगर आपको पिछले 10 दिनों से लगातार रोज फीवर आ रहा है। टेंप्रेचर 100.4 डिग्री फॉरेनहाइट से ज्यादा है। फीवर के साथ खांसी भी है तो आपको JN.1 हो सकता है। इन लक्षणों वाले मरीजों को तुरंत कोविड टेस्टिंग करवानी चाहिए।

JN.1 के 100 से ज्यादा मामले

8 दिसंबर को देश में JN.1 का पहला केस आया था। लेकिन अब इसकी संख्या 100 से ज्यादा हो गई है।26 दिसंबर को देश में सब-वैरिएंट JN.1 के 40 मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद देश में JN.1 के कुल 109 मरीज हो गए है। गुजरात से 36, कर्नाटक से 34, गोवा से 14, महाराष्ट्र से 9, केरल से 6, राजस्थान और तमिलनाडु से 4, तेलंगाना से 2, दिल्ली में 1 और गुरुग्राम में भी इसके केस सामने आए हैं।

WHO ने माना VOI

डब्ल्यूएचओ पूरी दुनिया में कोरोना वायरस केस पर नजर रखे हुए है। JN.1 संक्रमण में तेजी देखते हुए इस वैरिएंट को वैरिएंट ऑफ इंटेरेस्ट की लिस्ट में रखा है। हालांकि अभी भी इस वैरिएंट को कम खतरनाक और गंभीर मान रहा है। इसलिए लोगों को पैनिक नहीं होने की सलाह दे रहा है। वहीं भारत में ज्यादातर मरीज का इलाज उनके घर पर ही रखकर किया जा रहा है।

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