
मध्य और पश्चिमी अफ्रीकी देशों तक सीमित रहने वाली एक जूनोटिक बीमारी है एमपॉक्स। यह चेचक और गौ-चेचक जैसी बीमारियों के परिवार से ही आती है। मनुष्यों में इसका पहला मामला 1970 में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में दर्ज किया गया था। सबसे ज़्यादा बार इस बीमारी का प्रकोप भी इसी देश में हुआ है। किसी एक क्षेत्र तक सीमित रहने वाली यह बीमारी पहली बार 2022 में वैश्विक चिंता का विषय बनी। कैसे एक क्षेत्रीय बीमारी वैश्विक समस्या बन जाती है, यह जानने के लिए हमें एमपॉक्स के प्रकारों को समझना होगा।
एमपॉक्स वायरस के दो मुख्य प्रकार हैं: क्लैड वन और क्लैड टू। इनके उप-प्रकार भी होते हैं। 2022 और 2023 के बीच जब एमपॉक्स पहली बार दुनिया भर में फैला, तो इसका कारण क्लैड टू बी था। कांगो और नाइजीरिया से होते हुए यह बीमारी यूरोपीय देशों तक पहुँच गई। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार एमपॉक्स के प्रकोप को लेकर वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा की।
2023 तक यह बीमारी नियंत्रण में आ गई थी। अब खतरा क्लैड वन बी से है। पिछले प्रकारों की तुलना में यह ज़्यादा तेज़ी से फैलता है। कांगो में इसके मामलों और मृत्यु दर में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। मृत्यु दर अब 5% के करीब पहुँच चुकी है। शरीर पर फुंसियों का उठना इसका मुख्य लक्षण है। इसके साथ ही तेज बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द भी होता है। गर्दन की लसिका ग्रंथियों में तेज दर्द, सीने में दर्द और साँस लेने में तकलीफ होने पर यह बीमारी गंभीर हो जाती है।
यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। हवा के ज़रिए यह ज़्यादा दूर तक नहीं फैलता। हालाँकि, पास-पास रहकर बात करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। लक्षण दिखाई देने पर खुद को क्वारंटाइन कर लेना ही सबसे अच्छा उपाय है। मरीज़ द्वारा इस्तेमाल किए गए शौचालय, साबुन आदि का इस्तेमाल किसी और को नहीं करना चाहिए। मास्क का इस्तेमाल नियमित रूप से करना चाहिए।
मरीज़ को छूने से बचें, हाथों को साफ रखें। मरीज़ द्वारा इस्तेमाल की गई चीज़ों को अच्छी तरह से साफ करने के बाद ही उनका इस्तेमाल करें। यह कुछ और सावधानियाँ हैं जिनका पालन करना चाहिए। इस बीमारी से पूरी तरह ठीक होने में दो से चार हफ़्ते तक का समय लग सकता है। अभी तक इसकी कोई विशेष दवा नहीं बनी है, लेकिन अब तक के अध्ययनों से पता चलता है कि चेचक का टीका एमपॉक्स के ख़िलाफ़ भी कारगर है।
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