
हेल्थ डेस्क: नींद संबंधी समस्याएं अब बहुत कॉमन होती जा रही है। फिटबिट द्वारा 18 देशों में अध्ययन के अनुसार कम नींद के मामले में भारतीय दूसरे नंबर पर हैं। एक भारतीय औसतन 7 घंटे और 1 मिनट की नींद ले पाता है जबकि हमसे भी कम 6 घंटे 41 मिनट की नींद जापानी लेते हैं। ऐसे में आजकल इससे पीड़ित लोगों के बीच नींद की दवाएं काफी लोकप्रिय हो गई हैं। ऐसा तब होता है जब लोगों को नींद की गुणवत्ता, समय और मात्रा में समस्या होती है, जिसके परिणामस्वरूप दिन में परेशानी हो सकती है और शरीर के कामकाज में हानि हो सकती है। नींद के पैटर्न और आदतों को बदलने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे कई मामलों में स्लीप एपनिया या अनिद्रा हो सकती है।
स्लीप हाईजीन को करें मेंटेन
एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि जब कोई और चीज काम नहीं करती तो नींद की दवा ही आखिरी उपाय होना होती है। ‘जब आपने कई ऐसे तरीके अपना लिए हों, जो काम नहीं कर रहे हों तो नींद की दवा ही अंतिम उपाय है। नींद हाईजीन नाम की भी कोई चीज होती है। एक विशेष समय पर सोने और एक ही समय पर जागने की कोशिश करें। सुनिश्चित करें कि बैकग्राउंड में कोई शोर न हो।’ उन्होंने कहा कि सोने से पहले चाय या कॉफी जैसे किसी भी उत्तेजक पदार्थ का सेवन करने से बचना चाहिए।
कम नींद लेने के 10 बड़े खतरे
मेडिटेशन करने से मिलेगी नींद में मदद
डॉ. गुलेरिया ने कहा कि चाय या कॉफी जैसी कोई भी उत्तेजक चीज न लें। हल्का भोजन करें ताकि यह आपके सोने के समय में बाधा न डाले। ज्यादातर लोग कहते हैं कि नहाने से उन्हें आराम मिलता है। अगर इससे आपको सोने में मदद मिलती है तो आप ऐसा कर सकते हैं। ध्यान भी एक अच्छा ऑप्शन है। यदि इनमें से कोई भी काम नहीं करता है, तब आप डॉक्टर द्वारा खासकर लिखी गई नींद की दवा का सेवन कर सकते हैं।
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