
भारतीय थाली में दाल और दही दोनों ही पोषण से भरपूर माने जाते हैं। दाल प्रोटीन का अच्छा सोर्स है, वहीं दही पाचन और इम्युनिटी के लिए फायदेमंद माना जाता है। लेकिन आयुर्वेद और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, दही और दाल को एक साथ खाना हर किसी के लिए सही नहीं होता। यही वजह है कि इस कॉम्बिनेशन को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं-क्या यह जहर है या सही तरीके से लिया जाए तो वरदान? चलिए जानते हैं आगे।
आयुर्वेद के अनुसार दही गुरु (भारी) और एसिडीक नेचर का होता है, जबकि दाल भी (भारी) पचने में समय लेती है। दोनों को साथ खाने से अग्नि (डाइजेस्टिव फायर) कमजोर पड़ सकती है। इसका असर गैस, एसिडिटी और अपच के रूप में दिख सकता है, खासकर कमजोर पाचन वाले लोगों को इसे साथ खाने से मना किया जाता है।
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि दाल और दही का साथ में खाने से प्रोटीन का डबल लोड पड़ता है। इससे पेट में भारीपन, सूजन और कभी-कभी कब्ज या दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। रात के समय यह कॉम्बिनेशन और भी नुकसानदायक होती है।
नहीं। अगर आपकी पाचन शक्ति अच्छी है और आप दाल को पतला व हल्का रखते हैं (जैसे मूंग दाल) और दही ताजा व कम मात्रा में लेते हैं, तो नुकसान की संभावना कम हो जाती है। उत्तर भारत में दाल-चावल के साथ थोड़ा दही कई लोग बिना समस्या खाते हैं, यह शरीर की नेचर (वात, पित्त, कफ) पर निर्भर करता है।
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अगर दाल खा रहे हैं तो दही को अलग समय पर लें या छाछ के रूप में लें। दाल में हींग, अदरक और जीरा डालना पाचन को बेहतर बनाता है। इससे दोनों के असर कम हो जाते हैं।
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