यंग कैंसर सर्वाइवर पर हार्ट अटैक का जोखिम होता है HIGH, स्टडी में सामने आया डरावना सच

Published : May 17, 2023, 09:16 AM IST
cancer survivors

सार

कैंसर को मात देने के बाद यह कल्पना करना कि जिस दवा ने उनकी जान बचाई, वहीं उनके हेल्थ के लिए एक जानलेवा बीमारी की वजह बन जाएगी। युवा कैंसर सर्वाइवर में हार्ट अटैक का रिस्क हाई होने का सच सामने आया है।

हेल्थ डेस्क. कैंसर (Cancer) के जानलेवा बीमारी है, लेकिन डॉक्टर और मरीज के इच्छा शक्ति की वजह से वो इसे मात देकर ठीक हो जाते हैं। लेकिन कल्पना कीजिए कि उन कैंसर सर्वाइवर को कैसा लगेगा जब पता चलेगा कि जिस दवा ने उनकी जिंदगी बचाई, वहीं हार्ट अटैक (Heart attack)का हाई जोखिम लेकर आया है। एंथ्रासाइक्लिन, कीमोथेरेपी की एक विशेष श्रेणी जो कैंसर कोशिकाओं में डीएनए को तोड़ती है, युवा वयस्क कैंसर से बचे लोगों (निदान के समय 18 से 39 वर्ष के बीच) में दिल की विफलता के जोखिम को 2.6 गुना बढ़ा देती है।

एंथ्रासाइक्लिन से इलाज से ठीक हुए लोगों पर ज्यादा जोखिम

12,879 युवा वयस्क कैंसर जिनका इलाज एंथ्रासाइक्लिन के साथ किया गया था दिल की विफलता के जोखिम के अनुमान लगाने के लिए शोध किया गया। जिसमें पाया गया कि ल्यूकेमिया के कैंसर से बचे लोगों के लिए दिल की विफलता की घटनाएं सबसे ज्यादा थीं। इसके अतिरिक्त, किडनी, लिंफोमा, हड्डी और स्तन कैंसर से बचे लोगों में भी अन्य प्रकार के कैंसर के ट्रीटमेंट वाले शामिल प्रतिभागियों की तुलना में हार्ट अटैक की घटना अधिक थी। इस प्रकार के कैंसर का एंथ्रासाइक्लिन के साथ इलाज किए जाने की अधिक संभावना है।

कैंसर से ठीक हुए लोगों पर हार्ट अटैक और बांझपन का खतरा

नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी फीनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन ने इसे लेकर शोध किया। स्टडी से जुड़े लेखक और महामारी विज्ञान और रोकथाम के सहायक प्रोफेसर एलिजाबेथ हिबलर ने कहा कि शुक्र है कि इलाज की वजह से लोग तेजी से शुरुआती कैंसर से बच रहे हैं। लेकिन जब वो ट्रीटमेंट से गुजर ठीक होते हैं तो उनपर दिल की विफलता और बांझपन जैसे लॉन्ग टर्म जोखिम का खतरा बन जाता है। वो आगे बताते हैं कि मुझे न केवल लोगों को उनके कैंसर से बचने में मदद करने में दिलचस्पी है, बल्कि एक बार जब वे ऐसा कर लेते हैं, तो उन्हें कैंसर से बचे लोगों के रूप में उनके स्वास्थ्य और दीर्घायु में सुधार करने में मदद मिलती है।

कैंसर सर्वाइवर के निगरानी पर जोर डालती है स्टडी

वह शोध 16 मई को जेएसीसी: कार्डियो-ऑन्कोलॉजी पत्रिका में पब्लिश हुआ था। शोध की वरिष्ठ लेखिका डॉ. सादिया खान ने कहा कि हार्ट फेलियर के डायग्नोसिस की औसत आयु 32 वर्ष थी। जो न केवल बढ़े हुए जोखिम का संकेत देती है, बल्कि दिल की विफलता की शुरुआत भी होती है। यह शोध कैंसर सर्वाइवर को इस जोखिम से बचाने के लिए निगरानी और बचाव पर जोर डालती है। ऐसा नहीं है कि युवा सर्वाइवर पर ही हार्ट फेलियर का जोखिम है, बल्कि एंथ्रासाइक्लिन कीमोथेरेपी से ठीक हुए बच्चे और बुजुर्ग पर भी यह खतरा मंडराता है।

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