
ट्रैवल डेस्क। प्रयागराज महाकुंभ 2025 (Mahakumbh 2025) के सजकर तैयार हो चुका है। इस बार का कुंभ मेला कई मायनों में खास होने वाला है। ऐसे में अगर आप भी कुंभ जाने का प्लान कर रहे हैं तो प्रयागराज के प्रसिद्ध किलों का दीदार भी जरूर करें। ये किले जितने खूबसूरत हैं, उनते ऐतिहासिक भी। ऐसे में हम आपको उन 5 किलों के बारे में बताएंगे, जिन्हें कुंभा मेला ट्रिप के दौरान जरूर विजिट करें।
इलाहाबाद किला 1583 में सम्राट अकबर ने बनवाया था। ये किला त्रिवेणी संगम के नजदीक स्थित है। यानी, महाकुंभ से इसकी दूर ज्यादा नहीं है। आप मेले के अलावा कुछ अलग देखना चाहते हैं। तो यहां आ सकते हैं। ये किला अपनी भव्य वास्तुकला, अशोक स्तंभ, सरस्वती कूप और पातालपुरी मंदिर के लिए जाना जाता है। यहां पर 24 घंटे पुलिस का पहरा रहता है, हालांकि किले के कुछ हिस्सों को पर्यटकों के लिए खोला गया है।
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प्रयागराज के नजदीक स्थित कौशाम्बी जिले में स्थित ये किला मौर्य और गुप्त काल से जुड़ा हुआ है। यहां पर किले के अवशेष बचे हैं, लेकिन ये जगह अभी भी सैलानियों के मन में कौतहूल पैदा करती है। ये किला अपने प्राचीन खंडहरों, दुर्गों और बौद्ध स्तूपों के लिए जाना जाता है। हालांकि यहां घूमने के लिए आपके पास वक्त होन जरूरी है।
प्रयागराज से गंगा नदी के पार झूंसी में स्थित ये किला मान्याताओं के अनुसार कभी शहर हुआ करता था, लेकिन समय के साथ इस किले पर कई राजाओं ने कब्जा किया। वैसे तो अब ये खंडहर में तब्दील हो चुका है। हालांकि यहां पर ऐतिहासिक संरचनाओं के अवशेष देखे सकते हैं।
अब प्रयागराज आ रहे हैं तो आसपास के जिलों को भी एक्सप्लोर कर लीजिए। प्रयागराज से लगभग 70 किलोमीटर दूर विंध्याचल किला अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण जान जाता है। यहां पर कई वॉटरफॉल्स का मजा भी उठा सकते हैं। प्रयागराज से यहां पर ज्यादा से ज्यादा ढेड़ से दो घंटे का वक्त लगेगा।
प्रयागराज से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित चुनार किला बेहद खूबसूरत है। इसका निर्माण उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने किया था। ये किला गंगा किनारे स्थित है। जहां से नदी का शानदार नजारा दिखता है। किले का इतिहास शेरशाह सूरी और ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ है। यहां पर हर वक्त सैलानियों का तांता लग रहता है। अगर आप प्रयागराज आ रहे हैं और वक्त हैं तो इस किले को एक्सप्लोर कर सकते हैं।
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