
ट्रैवल डेस्क। बारिश के मौसम में महाराष्ट्र घूमने की बात कुछ और होती है। चारों तरफ हरियाली और बहते झरने दिल में बस जाते हैं। अगर कहा जाए मानसून के अलावा ठंड में भी महाराष्ट्र की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। तो आप क्या कहेंगे। लोणावला से रायगढ़ तक ऐसी कई जगहे हैं जहां टूरिस्ट जाना पसंद करते हैं लेकिन आज हम आपको महाराष्ट्र स्थित उन पांच किलों के बारे में बताएंगे जो मानसून नहीं बल्कि सर्दियों के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है। यहां पर ट्रैकिंग के साथ ऊंची-ऊंची पहाड़ियों को निहार सकते हैं।
तोरणा किला पुणे का सबसे ऊंचा किला है इसे प्रचंडगढ़ के नाम से भी जाना जाता है। जानकारी के अनुसार यह किला छत्रपति शिवाजी महाराज की पहली बड़ी जीत थी, जिसे उन्होंने सिर्फ 16 साल की उम्र में जीता था। इस किले की वास्तुकला अपने आप में अनोखी है। आप इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं तो यहां आ सकते हैं। इस किले में पुराने मंदिरों के साथ पानी के कुंड और प्राचीन दीवारें हैं। वहीं, जो लोग ट्रैकिंग पसंद करते हैं। वह बिना व्हीकल वेल्हे गांव से ट्रेक करते हुए यहां आसानी से पहुंच सकते हैं।
महाराष्ट्र के पश्चिमी तट पर स्थित विजयदुर्ग किला वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। समंदर किनारे स्थित होने से इसका महत्व बढ़ जाता है। आप दूर तक अरेबियन सी को निहारना चाहते हैं तो किसी महंगे रिजॉर्ट की बजाय यहां आ सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, किले का निर्माण 12वीं शताब्दी में किया गया था, 17वीं सदी में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसे जीतकर इसका नाम विजयदुर्ग रखा, जिसका मतलब है 'जीत का किला'। यह किला समुद्री दीवारों और मजबूत प्राचीरों के लिए प्रसिद्ध है।
जब बात मराठा इतिहास की होती है प्रतापगढ़ किले का जिक्र किया जाता है। महाबलेश्वर से 24 किलोमीटर दूर स्थित ये किला इतिहास को अपने अंदर समेटे हुए है। बताया जाता है ये वही किला है जहां 1659 में छत्रपति शिवाजी महाराज और अफजल खान के बीच प्रसिद्ध प्रतापगढ़ युद्ध हुआ था। सर्दियों में इस किले की खूबसूरती बढ़ जाती है। हल्की धुंध और गुलाबी सर्दी के बीच आप किले तक ट्रैकिंग कर सकते हैं।
अरेबियन सी घिरा सिंधुदुर्ग किला एक वास्तुकला का नमूना है। किले का निर्माण 1664 से 1667 के छत्रपति शिवाजी महाराज ने कराया है। खासियत की बात करें तो किले का निर्माण बेसाल्ट पत्थरों से किया गया है। जिसके आगे समंदर की लहरे भी सिर झुकाती है। ये किला आज भी उतनी मजबूती से खड़ा है। उस वक्त इस किले पर विजयी पानी नामुमकिन था। यहां कोई भी दुश्मन इस किले को नहीं जीत पाया। किले के आसपास कईन छोटे-मोटे किले भी स्थित हैं,जहां शिवाजी की सेन रहती थी।
हरिशचंद्रगढ़ किला महाराष्ट्र के सबसे पुराने किलों में शुमार है। जिसका निर्माण 6वीं शताब्दी में किया गया था। ये किला व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था। इसलिए कई राजाओं ने इस किले को जीतने की कोशिश हालांकि सबसे प्रसिद्ध मराठाओं और मुगलों का यद्ध हुआ। इस किले तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है। अगर आप यहां आना चाहते हैं तो ट्रेल्स जुन्नर गेट-नालीची वॉट से होकर गुजरना पड़ेगा। ये ट्रैकिंग रास्ता है। जो घने जंगलों के साथ खराब रास्तों से होकर गुजरती है। किले तक पहुंचने में जरूर मेहनत लगे पर आप यहां आने के बाद वापस नहीं लौटना चाहेंगे। मंदिर के पास केदारेश्वर मंदिर,प्ततीर्थ पुष्करिणी (एक पानी का कुंड, जिसे औषधीय गुणों वाला माना जाता है) जरूर एक्सप्लोर करें।
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