राज्यों के बीच 'ऑक्सीजन' की सप्लाई पर नहीं लगेगा बैन, SC ने केंद्र से पूछा-कोविड से निपटने का क्या है प्लान?

Published : Apr 22, 2021, 01:15 PM ISTUpdated : Apr 22, 2021, 04:30 PM IST
राज्यों के बीच 'ऑक्सीजन' की सप्लाई पर नहीं लगेगा बैन, SC ने केंद्र से पूछा-कोविड से निपटने का क्या है प्लान?

सार

कोरोना महामारी के बीच देश के अस्पतालों की चरमराती व्यवस्थाएं, खासकर ऑक्सीजन संकट और दवाओं की कालाबाजारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हुआ है। SC ने स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार से पूछा है कि कोविड-19 से निपटने उसकी क्या प्लानिंग है। इस बीच वैक्सीनेशन और स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर विपक्ष भी लगातार पॉलिटिक्स कर रहा है।  

नई दिल्ली. कोरोना महामारी के बीच देश के अस्पतालों की चरमराती व्यवस्थाएं, खासकर ऑक्सीजन संकट और दवाओं की कालाबाजारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हुआ है। SC ने स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार से पूछा है कि कोविड-19 से निपटने उसकी क्या प्लानिंग है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है। कोर्ट ने हरीश साल्वे को एमिकस क्यूरी(न्याय मित्र, जो कोर्ट की मदद करता है) नियुक्त किया है। इस बीच गृह मंत्रालय ने आदेश जारी किया है कि राज्यों के बीच मेडिकल ऑक्सीजन की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। ऑक्सीजन ले जाने वाले वाहनों के अंतर-राज्य आवाजाही की अनुमति दी जाए।

जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा 
चीफ जस्टिस एसए बोबड़े ने केंद्र से 4 सवालों का जवाब मांगा है। ऑक्सीजन की सप्लाई, जरूरी दवाओं की सप्लाई, वैक्सीनेशन का तरीका और लॉकडाउन लगाने का राज्यों का अधिकार। इस मामले में अब शुक्रवार को फिर सुनवाई होगी। चीफ जस्टिस ने टिप्पणी करते हुए कहा वे देख रहे हैं कि कोरोना से निपटने की तैयारियों और ऑक्सीजन जैसे मुद्दों पर 6 अलग-अलग हाईकोर्ट यानी दिल्ली, बॉम्बे, सिक्किम, मध्यप्रदेश, कलकत्ता और इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। ऐसे में कन्फ्यूजन हो सकता है। बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे एक नेशनल प्लान बताएं। फिर हाईकोर्ट्स को भी इस बारे में बताएं। सुप्रीम कोर्ट लॉकडाउन लगान का अधिकार राज्य सरकारों को सौंपना चाहती है। ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर दिल्ली के कई अस्पतालों ने हाईकोर्ट में भी मामला उठाया है। इस बीच गुरुवार को सरोज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ने भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने कहा कि उसके यहां भर्ती 172 में से 64 मरीजों को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत है। इससे पहले मैक्स अस्पताल भी हाईकोर्ट पहुंचा था।

हाईकोर्ट पहले ही इस मामले में सख्त है

  • 19 अप्रैल 2021 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजीत कुमार की डिवीजन बेंच ने सबसे ज्यादा कोविड-19 प्रभावित पांच शहर प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर और गोरखपुर में आगामी 26 अप्रैल तक लॉकडाउन लगाने का आदेश दिया था, लेकिन सरकार की चुनौती देने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर रोक लगा दी थी।
  • 20 अप्रैल 2021  को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को 49 पेज के विस्तृत आदेश देकर 19 बिंदुओं की एक गाइडलाइन जारी की है। इसमें कोरोना के गंभीर मरीजों को एक घंटे में अस्पताल में ही रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराने को कहा गया है। साथी ही केंद्र सरकार से रेमडेसिविर का उत्पादन बढ़ाने को भी कहा। अस्पतालों में इलाज की रेट लिस्ट जारी करने की बात भी कही थी।
  • 21 अप्रैल 2021 को दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को इंडस्ट्रीज की ऑक्सीजन सप्लाई फौरन रोकने का निर्देश दिया है। यह आदेश मैक्स अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद आया।

 

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  • 22 अप्रैल 2021 को कोलकाता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए चुनाव के दौरान कोविड-19 गाइड लाइन के उल्लंघन का मामला उठाया था।

दो राज्यों के बीच ऑक्सीजन सप्लाई का लेकर गृहमंत्रालय का बड़ा आदेश

गृह मंत्रालय ने आदेश जारी किया है कि राज्यों के बीच मेडिकल ऑक्सीजन की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। ऑक्सीजन ले जाने वाले वाहनों के अंतर-राज्य आवाजाही की अनुमति दी जाए। गृह मंत्रालय ने कहा कि परिवहन प्राधिकरणों (स्टेट अथॉरिटीज) को कहा जाएगा कि वे मेडिकल ऑक्सीजन लेकर जा रही गाड़ियों को अंतरराज्यीय मूवमेंट को फ्री करें। गुरुवार को इस संबंध में साफ दिशा-निर्देश जारी किए गए। गृहमंत्रालय ने कहा कि ऑक्सीजन निर्माता और इसके सप्लायर के ऊपर यह कहकर रोक नहीं लगाई जा सकती है कि वो जिस राज्य में उत्पादन कर रहा है, ऑक्सीजन उसे ही दें।

 No restriction shall be imposed on the movement of Medical Oxygen between the State and transport authorities shall be instructed to accordingly allow free inter-state movement of oxygen-carrying vehicles: MHA #COVID19 pic.twitter.com/EvOkeuT7By

 

वैक्सीनेशन की नीति पर सोनिया गांधी ने उठाए सवाल 

इस बीच वैक्सीनेशन और स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर विपक्ष भी लगातार पॉलिटिक्स कर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वैक्सीनेशन को केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। सोनिया गांधी का आरोप है कि कोरोना टीकी की नई नीति के जरिये केंद्र सरकार ने 18 से 45 साल के लोगों को मुफ्त टीक उपलब्ध कराने की अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। सोनिया गांधी ने सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा वैक्सीन के अलग-अलग रेट पर भी सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने कोरोना की रणनीति पर केंद्र सरकार पर साधा था निशाना
इससे पहले राहुल गांधी ने केंद्र की वैक्सीनेशन रणनीति की तुलना नोटबंदी से कर दी थी। ट्वीट करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार की वैक्सीन रणनीति नोटबंदी से कम नहीं है। आम जन लाइनों में लगेंगे, धन, स्वास्थ्य व जान का नुकसान झेलेंगे और अंत में सिर्फ कुछ उद्योगपतियों को इससे फायदा होगा।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने बताई ऑक्सीजन की किल्लत
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा-दिल्ली के कई अस्पतालों में ऑक्सीजन पूरी तरह खत्म हो गई है। सरोज, राठी, शांति मुकुंद, तीरथ राम अस्पताल, यूके अस्पताल, जीवन अस्पताल का कहना है कि हमारे यहां ऑक्सीजन खत्म हो गई है। हम जैसे-तैसे उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर देने की कोशिश कर रहे हैं। जब केंद्र सरकार ने दिल्ली का ऑक्सीजन का आवंटन बढ़ा दिया है, तो हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारें इस तरह का व्यवहार क्यों कर रही हैं जैसे दिल्ली का उत्तर प्रदेश और हरियाणा से झगड़ा है। जबकि इससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार और दिल्ली हाईकोर्ट का शुक्रिया करते हुए कहा कि पिछले दो-तीन दिन में उन्होंने बहुत मदद की है, जिसकी वजह से अब ऑक्सीजन दिल्ली पहुंचने लगी है। दिल्ली में ऑक्सीजन का कोटा 480 टन कर दिया गया है।

सांसद गौतम गंभीर उपलब्ध करा रहे मुफ्त दवाएं
भाजपा सांसद गौतम गंभीर के कार्यालय के बाहर बहुत से लोग दवा की पर्ची लेकर दवा के लिए पहुंचे। एक व्यक्ति ने कहा, कि हमें डॉक्टर ने फेबी फ्लू टैबलेट लाने को कहा है। यह दवा कहीं भी उपलब्ध नहीं है। यहां यह टैबलेट मुफ्त में दी जा रही है। इसे लेकर कांग्रेस ने जब सवाल उठाया, तो गंभीर ने कहा-कुछ सौ स्ट्रिप्स अपनी जेब से लेकर गरीबों की मदद की जाए तो क्या इसे जमाखोरी कहते है? वे लोग कह रहे हैं जिन्होंने रेमडेसिविर को 30-40 हजार रुपये में और एक बेड को 5-10 लाख रुपये में बिकने दिया। आप अपनी जेब से गरीबों की जिंदगी बचाते हैं तो, वे इस पर राजनीति करना चाहते हैं। आप जागृति जाकर देख लें हम किस तरह से फेबी फ्लू बांट रहे हैं। लोग अपना आधार और दवा की पर्ची  लेकर आएं। जितनी टैबलेट की जरूरत है, हम मुफ्त में उपलब्ध कराते हैं। जितने दिन हम चला पाएंगे चलाएंगे। हमारी कोशिश है कि गरीबों की जिंदगी बच जाए, उनको फेबी फ्लू मिल जाए।

 

ऑक्सीजन के मुद्दे पर बोले केजरीवाल
ये बहुत बड़ी आपदा है, अगर इसमें हम हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, गुजरात, पश्चिम बंगाल में बंट गए तो भारत नहीं बचेगा, इस वक्त हमें एक-दूसरे की मदद करनी है। अगर दिल्ली में जरूरत से ज़्यादा ऑक्सीजन होगी तो हम दूसरे राज्यों को दें। हमारा ऑक्सीजन का जो कोटा बढ़ा है, उसमें काफी ऑक्सीजन ओडिशा से आनी है। बढ़े हुए कोटे की ऑक्सीजन को दिल्ली पहुंचने में कुछ दिन लग जाएंगे, हम कोशिश कर रहे हैं कि हवाईजहाज से ऑक्सीजन लाई जा सके। राज्यों ने कहा कि दिल्ली का कोटा भी हम इस्तेमाल करेंगे, दिल्ली के ट्रक नहीं जाने देंगे। मैं केंद्र सरकार और दिल्ली हाईकोर्ट का शुक्रिया करना चाहता हूं, पिछले दो-तीन दिन में उन्होंने हमारी बहुत मदद की है जिसकी वजह से अब ऑक्सीजन दिल्ली पहुंचने लगी है।

 

हमारा ऑक्सीजन का जो कोटा बढ़ा है, उसमें काफी ऑक्सीजन ओडिशा से आनी है। बढ़े हुए कोटे की ऑक्सीजन को दिल्ली पहुंचने में कुछ दिन लग जाएंगे, हम कोशिश कर रहे हैं कि हवाईजहाज से ऑक्सीजन लाई जा सके: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल pic.twitter.com/Zi0qpLmH8W

 

 

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