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कोरोना से हाहाकार: पत्नी तड़पने लगी तो पति ने ठेले पर लगाया ऑक्सीजन, फिर रोते हुए चल पड़ा

इब्राहिम ने आनन फानन में पास खड़े खड़े ठेले को ही अपना ऐंबुलेंस बना लिया। उस पर पत्नी को लिटाकर अस्पताल ले जाने लगा। इतना ही नहीं जब उसकी सांसे उखड़ने लगीं तो ठेले पर ही ऑक्सीजन सिलेंडर लगा दिया। जिसने भी यह सीन देखा वह भावुक हो गया। बिलखता परिवार ठेले पर ऑक्सीजन लगाए चले जा रहा था।

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Ujjain, First Published Apr 22, 2021, 3:04 PM IST
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उज्जैन (मध्य प्रदेश). हर तरफ इस वक्त एक ही आवाज है कोरोना..कोरोना और अस्पतालों में मरीजों के परिजन खाली बेड और ऑक्सीजन सिलेंडर बिलख रहे हैं। लेकिन एक ना कहकर उन्हें लौटा दिया जा रहा है। तड़पते लोगों को कोई मदद नहीं मिल पा रही है। कई राज्य सरकारों की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। जहां रोजाना मरीज ऑक्सीजन की कमी के चलते दम तोड़  रहे हैं। ऐसी एक बेबसी की तस्वीर मध्य प्रदेश के उज्जैन से सामने आई है। जहां सिस्टम के आगे लाचार महिला की जब सांसे उखड़ने लगी तो ठेले पर ही ऑक्सीजन लगा दी, क्योंकि कई मिन्नतें करने के बाद भी एंबुलेंस मिली। इसके बाद वह रोता हुआ पत्नी को ठेले पर लेकर चल पड़ा।

कई मिन्नतें करने के बाद भी नहीं  आई ऐंबुलेंस
दरअसल, उज्जैन के रहने वाले इब्राहिम की पत्नी छोटी बी अस्थमा की मरीज है। बुधवार शाम उसकी अचानक तबीयत खराब हो गई। उसकी तेज-तेज सांसे चलने लगीं, मामला बिगड़ता देख पति ने कई ऐंबुलेंस वालों को कॉल किए, लेकिन कोई आने को तैयार नहीं हुआ। वह विनती करता रहा कि आपको जितना पैसा चाहिए मिल जाएगा, बस आ जाओ, नहीं तो मेरी पत्नी मर जाएगी। लेकिन किसी ऐंबुलेंस चालक का दिल नहीं पसीजा।

यह सीन देख हर कोई हो गया भावुक
इब्राहिम ने आनन फानन में पास खड़े खड़े ठेले को ही अपना ऐंबुलेंस बना लिया। उस पर पत्नी को लिटाकर अस्पताल ले जाने लगा। इतना ही नहीं जब उसकी सांसे उखड़ने लगीं तो ठेले पर ही ऑक्सीजन सिलेंडर लगा दिया। जिसने भी यह सीन देखा वह भावुक हो गया। बिलखता परिवार ठेले पर ऑक्सीजन लगाए चले जा रहा था।

पति की सूझ बूझ से बची पत्नी की जान
बता दें कि महिला अभी अस्पताल में भर्ती है और उसकी तबीयत ठीक है। परिवार के सदस्यों और इब्राहिम की सूझ बूझ से सही समय पर उसे अस्पताल पहुंचा कर उसकी जान बचा ली इब्राहिम का कहना है अगर चंद सेकेंड की देर हो जाती तो मेरी पत्नी की जान जा सकती थी। इब्राहिम सिर्फ आठवीं क्लास तक पढ़े हैं उनके सही फैसले ने परिवार को उजड़ने से बचा लिया। अगर वह सरकारी सिस्टम का इंतजार करते तो पता नहीं क्या हो जाता।

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