
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अब भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को इशारों ही इशारों में कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साउथ चाइना सी में चीन की दादागिरी को विश्वास को नष्ट करने वाली 'कार्रवाई' बताया। साथ ही उन्होंने इस पर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान के महत्व पर जोर दिया।
एस जयशंकर 15वें ईस्ट एशिया शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। यह शिखर सम्मेलन वर्चुअल तरीके से हुआ। इसकी अध्यक्षता वियतनाम के पीएम नगुयेन शुआजन फूक ने की। इसमें आशियान के सभी देश शामिल हुए। ईस्ट एशिया समिट एशिया प्रशांत क्षेत्र के मुद्दों से निपटने के लिए एक प्रमुख फोरम है। यह 2005 में शुरू किया गया था।
चीन को दिया साफ संदेश
इस दौरान एस जयशंकर ने कहा, सभी को साउथ चाइना सी में अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान का ध्यान रखना चाहिए। उनका इशारा साफ तौर पर चीन की तरफ था। इस दौरान उन्होंने हिंद-प्रशांत इलाके के बारे में बात की और इस क्षेत्र के बढ़ते महत्व की ओर ध्यान आकर्षित कराया जो आसियान के 10 देशों का एकीकृत और मूलभूत नौवहन क्षेत्र है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी दिया जोर
भारतीय विदेश मंत्री कोरोना वायरस के बाद दुनिया में व्यापक पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया, जिससे आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और महामारी से निपटा जा सके। विदेश मंत्री जयशंकर का संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर यह बयान ऐसे वक्त पर आया, जब पूर्वी लद्दाख में सीमा को लेकर भारत और चीन के बीच विवाद चल रहा है। वहीं, चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी विस्तारवादी नीति से आसपास के देशों को भी परेशानी में डाल रहा है।
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