क्या भारत ने सच में रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है? अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने किया दावा, बताई वजह

Published : Jan 21, 2026, 07:34 AM IST

Global Energy Politics: क्या ट्रंप के 25% टैरिफ के दबाव में भारत ने सचमुच रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है? अमेरिकी ट्रेजरी का दावा, मोदी–ट्रंप बातचीत पर विरोधाभास और 500% टैरिफ की धमकी-क्या यह रणनीतिक दबाव है या वैश्विक ऊर्जा राजनीति का नया खेल? 

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India Russia Oil import Stop: भारत और अमेरिका के रिश्तों में इन दिनों एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। वजह है रूसी कच्चे तेल (Russian Crude Oil) को लेकर अमेरिका के बड़े दावे। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। क्या यह दावा सच है या सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति?

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ट्रंप ने ऐसा क्या कहा, जिससे विवाद बढ़ गया?

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे बातचीत में कहा था कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देगा। इस बयान के सामने आते ही भारत सरकार ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी कोई बातचीत हुई ही नहीं। यहीं से यह मामला राजनीतिक बयानबाज़ी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा बन गया।

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भारत ने अमेरिकी टैरिफ पर क्या प्रतिक्रिया दी?

भारत सरकार ने अमेरिकी कदम को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और तर्कहीन” बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ कहा कि भारत के एनर्जी सोर्सिंग फैसले किसी दबाव में नहीं, बल्कि ग्लोबल मार्केट की स्थिति, देश की ऊर्जा जरूरत और आम लोगों को सस्ती सप्लाई को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। यानी भारत ने यह नहीं कहा कि उसने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है, बल्कि यह कहा कि वह स्थिति पर नजर रखे हुए है।

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500% टैरिफ की धमकी क्या वाकई लागू हो सकती है?

अमेरिका में रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेट में रखा गया है। खुद स्कॉट बेसेंट ने माना कि इसके लिए ट्रंप को सीनेट की मंजूरी चाहिए। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यूरोप आज भी रूसी तेल खरीद रहा है, जो इस पूरे मुद्दे में अमेरिका के दोहरे रवैये की ओर इशारा करता है।

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भारत झुका या रणनीति बदल रहा है?

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है। ऐसे में टैरिफ की धमकियों को कई विशेषज्ञ नेगोशिएशन टैक्टिक मानते हैं। फिलहाल, कोई आधिकारिक भारतीय घोषणा नहीं है कि भारत ने रूसी तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर दिया है।

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बड़ा सवाल: बयानबाज़ी या बड़ा रणनीतिक बदलाव?

भारत अपने राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और सस्ती सप्लाई को प्राथमिकता देता है न कि किसी देश के दबाव को। अमेरिकी दावे और भारतीय रुख के बीच सच्चाई कहीं बीच में है। भारत ने न तो खुलकर रूसी तेल छोड़ा है, न ही किसी दबाव में झुकने की बात मानी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह सिर्फ बयानबाज़ी थी या वैश्विक ऊर्जा राजनीति का नया मोड़।

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