पाकिस्तान भरोसेमंद नहीं! इजराइल ने US-ईरान बातचीत में 'मध्यस्थ' भूमिका पर क्यों उठाए सवाल?

Published : Apr 09, 2026, 01:52 PM IST

क्या पाकिस्तान की ‘बिचौलिया’ भूमिका US–Iran Ceasefire को बचाएगी या यही बनेगी सबसे बड़ी कमजोरी? इज़राइल ने इसे “भरोसेमंद नहीं” बताया, जबकि Middle East में Hezbollah और Lebanon को लेकर तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। क्या 11 अप्रैल की बातचीत शांति लाएगी?

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Israel Pakistan Mediation CeasefireTalks: मध्य पूर्व में चल रही जंग और सीज़फायर की कोशिशों के बीच एक नया विवाद सामने आ गया है। इज़राइल ने खुलकर पाकिस्तान की ‘मध्यस्थ’ (Mediator) की भूमिका पर सवाल उठा दिए हैं। भारत में इज़राइल के राजदूत रूवेन अज़ार ने साफ कहा कि पाकिस्तान को “भरोसेमंद खिलाड़ी” नहीं माना जा सकता। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत की तैयारी हो रही है। क्या पाकिस्तान की भूमिका इस पूरे शांति प्रयास को कमजोर कर सकती है?

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पाकिस्तान पर विश्वास करना मुश्किल: इज़राइल ने क्यों उठाए सवाल?

इज़राइल ने पहली बार इतनी स्पष्ट भाषा में पाकिस्तान पर शक जताया है। रूवेन अज़ार ने कहा कि भले ही अमेरिका ने अपने कारणों से पाकिस्तान को शामिल किया हो, लेकिन इज़राइल उसे भरोसेमंद नहीं मानता। इज़राइल का मानना है कि मध्यस्थ वही होना चाहिए जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो। पाकिस्तान की पिछली भूमिका और क्षेत्रीय राजनीति को लेकर संदेह बना हुआ है। इस बयान ने साफ कर दिया कि पर्दे के पीछे चल रही डिप्लोमेसी उतनी आसान नहीं है जितनी दिखती है।

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US-Iran बातचीत से पहले बढ़ा तनाव

11 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत होने की संभावना है। खबर है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance इस्लामाबाद जा सकते हैं। इससे पाकिस्तान की भूमिका और अहम हो जाती है, लेकिन इज़राइल के बयान ने इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर बातचीत से पहले ही अविश्वास बढ़ता है, तो सीज़फायर की राह और मुश्किल हो सकती है।

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गाज़ा मॉडल की तुलना: कतर-तुर्की जैसा मामला?

इज़राइल ने पाकिस्तान की भूमिका की तुलना पहले के गाज़ा संघर्ष से की, जहां कतर और तुर्की जैसे देशों ने मध्यस्थता की थी। इज़राइल ने इन देशों को “समस्याग्रस्त” बताया और संकेत दिया कि पाकिस्तान भी उसी तरह का जोखिम हो सकता है। इस तुलना से साफ है कि इज़राइल किसी भी ऐसे देश पर भरोसा नहीं करना चाहता, जिसका सीधा या परोक्ष संबंध विवादित संगठनों या पक्षों से रहा हो।

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लेबनान और हिज़्बुल्लाह: इज़राइल का असली लक्ष्य क्या है?

अज़ार ने हिज़्बुल्लाह और ईरान के बीच अंतर स्पष्ट किया। उनका कहना है कि तेल अवीव का लक्ष्य दक्षिणी लेबनान को हिज़्बुल्लाह के आतंकवादी ढांचे से मुक्त करना है। "यह लेबनानी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह बातचीत के साथ-साथ हिज़्बुल्लाह की ताकत को खत्म करे," उन्होंने कहा। इस बीच, इज़राइली वायु सेना ने हाल ही में पूरे लेबनान में 250 से ज्यादा हिज़्बुल्लाह आतंकवादियों को निशाना बनाया। इसका मकसद उत्तरी सीमा पर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। रूवेन अज़ार ने कहा कि तेल अवीव और अमेरिका का ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल पर है। उनका मानना है कि बातचीत का लक्ष्य इन दो बड़े खतरों को खत्म करना है। "हमने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि हम इस सीज़फ़ायर का समर्थन करते हैं। अमेरिका की अगुवाई में यह बातचीत होगी, और यह बहुत सकारात्मक संकेत है," अज़ार ने कहा।

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ईरान के दो बड़े खतरे: परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम

  • इज़राइल के मुताबिक, ईरान से जुड़े दो बड़े खतरे हैं:
  • परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program)
  • बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम

इज़राइल चाहता है कि अमेरिका के नेतृत्व में होने वाली बातचीत इन दोनों मुद्दों को खत्म करने की दिशा में जाए। इज़राइल ने सीज़फायर का समर्थन तो किया है, लेकिन साफ कहा है कि सिर्फ अस्थायी शांति नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।

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सीज़फायर पर खतरा: क्या फिर भड़क सकता है युद्ध?

इधर ईरान ने आरोप लगाया है कि इज़राइल की लेबनान में जारी कार्रवाई सीज़फायर को खतरे में डाल रही है। ईरान ने चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे तो समझौता टूट सकता है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में फिर तनाव बढ़ सकता है। वहीं डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही कह चुके हैं कि लेबनान इस सीज़फायर का हिस्सा नहीं है।

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सीज़फायर पर खतरा: क्या फिर भड़क सकता है युद्ध?

इधर ईरान ने आरोप लगाया है कि इज़राइल की लेबनान में जारी कार्रवाई सीज़फायर को खतरे में डाल रही है। ईरान ने चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे तो समझौता टूट सकता है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में फिर तनाव बढ़ सकता है। वहीं डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही कह चुके हैं कि लेबनान इस सीज़फायर का हिस्सा नहीं है।

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क्या पाकिस्तान बनेगा ‘कमजोर कड़ी’?

पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ है-सीज़फायर की राह आसान नहीं है।

  • पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल
  • इज़राइल की सुरक्षा चिंताएं

ईरान का दबाव और अमेरिका की कूटनीति-ये सब मिलकर एक बेहद जटिल स्थिति बना रहे हैं।

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