सुप्रीम कोर्ट जाएंगे थलापति विजय? TVK का 'प्लान-B' तैयार, क्या 2019 का महाराष्ट्र सीन दोहराएगा तमिलनाडु

Published : May 07, 2026, 10:27 PM IST

Tamil Nadu Politics: थलापति विजय सरकार बनाने का दावा लेकर 24 घंटे में दो बार राजभवन पहुंचे, लेकिन खाली हाथ लौटना पड़ा। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उनसे 118 विधायकों का समर्थन लाने को कहा। अब कहा जा रहा कि थलापति सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। 

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क्या थलापति विजय 'प्लान-B' पर काम कर रहे हैं?

जब राजभवन से दो बार (6 और 7 मई) खाली हाथ लौटना पड़ा, तो विजय ने हार नहीं मानी। खबरों की मानें तो अब विजय अपने 'प्लान-B' पर काम कर रहे हैं। मतलब सुपरस्टार कानूनी लड़ाई लड़ सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय की टीम सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी के संपर्क में है। वे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर तर्क दे सकते हैं कि राज्यपाल का व्यवहार संवैधानिक नहीं है। विजय का कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उन्हें सरकार बनाने का पहला मौका मिलना चाहिए और बहुमत साबित करने के लिए विधानसभा का फ्लोर इस्तेमाल होना चाहिए, न कि राजभवन।

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क्या तमिलनाडु में होगा 2019 का 'महाराष्ट्र वाला सीन'?

सोशल मीडिया पर लोग 2019 के महाराष्ट्र चुनाव की चर्चा कर रहे हैं। उस वक्त किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था, लेकिन बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी थी। तब राज्यपाल ने देवेंद्र फडणवीस को सरकार बनाने का न्योता दिया था और सुबह 5:30 बजे शपथ दिलाई गई थी। हालांकि, वो सरकार फ्लोर टेस्ट पास नहीं कर पाई थी। अब तमिलनाडु में भी विजय यही मांग कर रहे हैं कि उन्हें भी फ्लोर पर अपनी ताकत दिखाने का मौका दिया जाए।

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थलापति विजय के पास कितने विधायक?

विजय की पार्टी चुनाव में 108 सीट जीती है, लेकिन वे खुद दो सीट से चुनाव लड़कर जीते हैं, तो नियम के अनुसार, एक सीट छोड़ना पड़ेगा, जिससे विधायकों की संख्या 107 हो जाती है। एक विधायक सदन में फ्लोर टेस्ट के समय सभापति बन सकता है, जिससे संख्या 106 हो जाती है। उनके पास कांग्रेस के 5 विधायक हैं, यानी कुल 112। अब भी उन्हें बहुमत के आंकड़े 118 तक पहुंचने के लिए 6 और विधायकों की जरूरत है।

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राज्यपाल किस वजह से विजय को सरकार बनाने का न्योता नहीं दे रहे?

संविधान का अनुच्छेद 164(1) राज्यपाल को पावर देता है कि वे मुख्यमंत्री की नियुक्ति करें, लेकिन नियम यह भी कहता है कि अगर किसी को स्पष्ट बहुमत न मिले, तो यह राज्यपाल के विवेक पर निर्भर है कि वे किसे बुलाते हैं। तमिलनाडु के राज्यपाल चाहते हैं कि एक स्थायी सरकार बने, इसलिए वे विजय से पूरे 118 विधायकों की लिस्ट मांग रहे हैं। दूसरी ओर, विजय के समर्थक और कुछ विपक्षी पार्टियां इसे बीजेपी की चाल बता रहे हैं, ताकि विजय को सत्ता से दूर रखा जा सके। 1994 के 'एसआर बोम्मई केस' में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि बहुमत का फैसला राजभवन में नहीं, बल्कि विधानसभा में होना चाहिए।

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अगर बात नहीं बनी तो क्या होगा?

अगर विजय अगले कुछ दिनों में बहुमत साबित नहीं कर पाते या राज्यपाल उन्हें मौका नहीं देते, तो तमिलनाडु में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। इसका मतलब होगा कि विधानसभा भंग हो जाएगी और दोबारा चुनाव होंगे। तब तक केंद्र सरकार के जरिए राज्यपाल ही राज्य का प्रशासन संभालेंगे। फिलहाल विजय के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प खुला है। 2018 में कर्नाटक और 2019 में महाराष्ट्र के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने 24 से 48 घंटे के अंदर 'फ्लोर टेस्ट' कराने का आदेश दिया था।

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